आजकल लोग फिल्में और वेब सीरीज देखने के लिए OTT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. कई ग्राहक बिना विज्ञापन के वीडियो देखने के लिए सालाना सब्सक्रिप्शन भी खरीदते हैं. अगर पैसे देने के बाद भी बीच में विज्ञापन आने लगें, तो परेशानी होना स्वाभाविक है. ऐसा ही एक मामला हैदराबाद में सामने आया, जहां एक ग्राहक की शिकायत पर उपभोक्ता आयोग ने Amazon को कुल 9,499 देने का आदेश दिया है.

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ग्राहक राजेश का कहना था कि उन्होंने जिस सुविधा के लिए पैसे दिए थे, उसे बीच में बदल दिया गया. उन्होंने Amazon के कस्टमर सपोर्ट से संपर्क करके विज्ञापन हटाने या पूरी सब्सक्रिप्शन फीस वापस करने की मांग की. लेकिन उनकी शिकायत के मुताबिक, उन्हें पूरी रकम लौटाने के बजाय केवल बची हुई अवधि के हिसाब से रिफंड देने का विकल्प मिला. इसके बाद ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया, उन्होंने सब्सक्रिप्शन की पूरी रकम वापस करने के साथ मानसिक परेशानी के लिए मुआवजे और कानूनी खर्च की भी मांग की.

1,499 रुपये का सालाना प्लान लेने के बाद भी दिखे विज्ञापन

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हैदराबाद के रहने वाले कोंढोबा राजेश ने 11 मई 2025 को 1,499 रुपये में Amazon Prime का सालाना सब्सक्रिप्शन लिया था. ग्राहक का कहना था कि इस प्लान में उन्हें एक साल तक मोबाइल, टीवी और लैपटॉप पर बिना विज्ञापन के वीडियो देखने की सुविधा मिली थी.

हालांकि, उनका आरोप था कि सालाना प्लान खत्म होने से पहले ही 17 जून 2025 से प्राईम विडीयो पर विज्ञापन दिखने लगे. इसके बाद बिना विज्ञापन के वीडियो देखने के लिए उनसे 699 रुपये अतिरिक्त देने को कहा गया.

Amazon को कितने पैसे देने होंगे?

आयोग ने Amazon को ग्राहक की शिकायत पर राहत देते हुए तीन भुगतान करने का आदेश दिया है:

  • 1,499 रुपये- सालाना सब्सक्रिप्शन की पूरी रकम वापस करने के लिए.
  • 5 हजार- ग्राहक को मुआवजे के तौर पर.
  • 3 हजार- कानूनी खर्च के लिए.

इस तरह कंपनी को कुल 9,499 रुपये देने होंगे, आयोग ने आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया है. यह मामला ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन लेते समय मिलने वाली सुविधाओं और कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर अहम है.

उपभोक्ता आयोग ने क्या कहा?

हैदराबाद के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I ने 1 अक्टूबर 2026 को इस मामले में आदेश दिया. आयोग ने पाया कि ग्राहक के सालाना प्लान की अवधि पूरी होने से पहले विज्ञापन दिखाए गए और बिना विज्ञापन देखने के लिए अतिरिक्त पैसे मांगे गए.

आयोग के अनुसार, कंपनी यह साबित नहीं कर पाई कि ग्राहक को प्लान खरीदते समय साफ तौर पर बताया गया था कि बीच में विज्ञापन शुरू हो सकते हैं और उन्हें हटाने के लिए अलग से भुगतान करना होगा. Amazon की ओर से आयोग में पेश होकर जवाब भी दाखिल नहीं किया गया.

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