Vande Bharat Express: भारतीय रेलवे की आधुनिक ट्रेन सेवा वंदे भारत एक्सप्रेस हर किलोमीटर के सफर में औसतन 20 यूनिट बिजली की खपत करती है. भारतीय रेलवे द्वारा बिजली कंपनियों को दिए जाने वाले औसत बल्क रेट के हिसाब से प्रति किलोमीटर बिजली का खर्च लगभग ₹130 आता है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि ट्रेन को चलाने के लिए कितनी ऊर्जा की जरूरत होती है और इसके संचालन में कितना खर्चा आता है.

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बिजली की खपत और उससे बनने वाला बिल, तय की गई दूरी पर निर्भर करते हैं. उदाहरण के लिए गोरखपुर और लखनऊ के बीच की लगभग 275 किलोमीटर की दूरी को लें. इस रूट पर एक तरफा के सफर में वंदे भारत ट्रेन लगभग 5200 से 5400 यूनिट बिजली की खपत करती है. इससे पता चलता है कि पूरे सफर के दौरान बिजली की कुल खपत कितनी तेजी से बढ़ जाती है, भले ही प्रति किलोमीटर औसत खपत एक जैसे ही क्यों ना रहे. 

बिजली का बिल कैसे तय होता है? 

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भारतीय रेलवे बिजली कंपनियों से बल्क रेट पर बिजली खरीदती है. इस हिसाब-किताब के लिए औसत दर ₹6.50 प्रति यूनिट मानी गई है. अगर इस दर को ट्रेन की औसत खपत से गुणा करें तो एक सीधा सा अनुमान मिलता है. 20 यूनिट को ₹6.50 से गुणा करने पर प्रति किलोमीटर ₹130 का खर्च आता है.

गोरखपुर लखनऊ के लगभग 275 किलोमीटर के सफर में एक तरफ की यात्रा के लिए बिजली का खर्चा लगभग ₹34,000 से ₹35,000 आता है. यह आंकड़ा सिर्फ ट्रेन को चलाने के लिए जरूरी बिजली का खर्च है. यह इस सेवा को चलाने का कुल खर्च नहीं है और इसे रेलवे के कुल संचालन खर्च के साथ नहीं जोड़ना चाहिए. 

इस अनुमान में मुख्य रूप से ट्रेन के इंजन और कोच को चलाने के लिए जरूरी बिजली का खर्च शामिल है. इसमें कर्मचारियों का वेतन या फिर रखरखाव का खर्च शामिल नहीं है. ये खर्च बिजली के बिल से अलग होते हैं इस वजह से प्रति सफर का यह आंकड़ा कुल वित्तीय तस्वीर का सिर्फ एक हिस्सा है. यहां बताई गई रकम औसत बिजली खपत और बिजली की थोक दर पर आधारित एक अनुमान है. 

रीजेनरेटिव ब्रेकिंग से ऊर्जा बचाने में मदद 

बिजली की खपत के अलावा वंदे भारत में एक रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम लगा है. इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जब ट्रेन धीमी होती है या फिर रुकती है तो कुछ ऊर्जा वापस मिल सके. सामान्य ब्रेकिंग प्रक्रिया में ट्रेन की रफ्तार कम हो जाती है. वहीं रीजेनरेटिव ब्रेकिंग में जब लोको पायलट ब्रेक लगाता है तो पहियों की रफ्तार से जुड़ी काइनेटिक एनर्जी वापस बिजली में बदल जाती है. 

इस प्रक्रिया से बनी बिजली को ओवरहेड लाइनों के जरिए रेलवे के पावर ग्रिड में वापस भेज दिया जाता है. ट्रेन को धीमा करने में इस्तेमाल हुई सारी ऊर्जा को बेकार जाने देने के बजाय यह सिस्टम उसका कुछ हिस्सा वापस नेटवर्क को लौटा देता है. इस तरह वापस मिली बिजली का इस्तेमाल रेलवे की कुल ऊर्जा जरूरत को पूरा करने में किया जा सकता है. 

ऐसा कहा जाता है कि यह तकनीक हर दिन लगभग 1153 यूनिट बिजली बनाती और बचाती है. इससे रेलवे के बिजली बिल में लाखों रुपये की बचत होती है. यह दैनिक आंकड़ा दिखाता है कि ट्रेन की सामान्य बिजली खपत के साथ-साथ रीजेनरेटिव ब्रेकिंग किस तरह योगदान दे सकती है.

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आंकड़ों को समझना 

इस तरह वंदे भारत की अनुमानित बिजली लागत को तीन जुड़े हुए आंकड़ों से समझा जा सकता है. प्रति किलोमीटर 20 यूनिट की औसत खपत, प्रति यूनिट ₹6.50 का औसत रेट और प्रति किलोमीटर ₹130 का अनुमानित बिजली खर्च. गोरखपुर और लखनऊ के बीच लगभग 275 किलोमीटर की यात्रा में खपत लगभग 5200 से 5000 से यूनिट होती है और एक तरफ का बिजली बिल लगभग ₹34,000 से ₹35,000 आने का अनुमान है.

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