Police Behaviour Report: दुनिया के अलग अलग देशों में पुलिस को लेकर लोगों का नजरिया बेहद अलग अलग है, कहीं पुलिस पर भरोसा इतना गहरा है कि लोग बेखौफ रात में अकेले घूमते हैं, तो कहीं पुलिस का नाम सुनते ही डर और अविश्वास पैदा हो जाता है. अमेरिकी संस्था गैलप और मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट्स से इस बात की झलक मिलती है, कि आखिर कहां की पुलिस सबसे फ्रेंडली मानी जाती है और कहां गंभीर सवाल उठते रहे हैं.

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यहां की पुलिस पर लोगों को है सबसे ज्यादा भरोसा

गैलप के लॉ एंड ऑर्डर इंडेक्स के मुताबिक, ताजिकिस्तान 97 अंकों के साथ पुलिस पर जनता के भरोसे के मामले में दुनिया में सबसे आगे है. इसके बाद सिंगापुर 95, कोसोवो 94, जबकि चीन, आइसलैंड और वियतनाम संयुक्त रूप से 93 अंकों के साथ टॉप देशों में शामिल हैं. सिंगापुर लगभग हर साल इस लिस्ट में सबसे ऊपर या टॉप देशों में बना रहता है, जो वहां की अनुशासित पुलिसिंग और बेहद कम अपराध दर को दर्शाता है. फिनलैंड, नॉर्वे और लक्जमबर्ग जैसे यूरोपीय देश भी 92 अंकों के साथ इस लिस्ट में ऊपर रहे हैं, जहां पुलिस को आमतौर पर मददगार और भरोसेमंद माना जाता है.

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यहां पुलिस पर भरोसा है सबसे कमजोर

इसके उलट, लाइबेरिया जैसे देशों में लोगों का पुलिस पर भरोसा सबसे कम पाया गया, जहां स्कोर सिर्फ 49 रहा. अफगानिस्तान भी लगातार कई सालों तक इस इंडेक्स में सबसे निचले पायदान पर रहा है. वहीं एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच की अलग-अलग रिपोर्ट्स में अंगोला, मोजाम्बिक, दक्षिण अफ्रीका और कुछ लैटिन अमेरिकी देशों की पुलिस पर बार-बार गैरकानूनी बल प्रयोग, हिरासत में मौत और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक सख्ती जैसे गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं.

सिर्फ आरोप नहीं, दस्तावेजी सबूत भी शामिल

इन रिपोर्ट्स में सिर्फ जनता की राय ही नहीं, बल्कि दर्ज मामलों, गवाहियों और आधिकारिक जांच एजेंसियों के डेटा को भी आधार बनाया जाता है. जैसे दक्षिण अफ्रीका में स्वतंत्र पुलिस जांच निदेशालय (IPID) हर साल पुलिस बर्बरता से जुड़ी हजारों शिकायतें दर्ज करता है, जो वहां जवाबदेही की कमी को उजागर करता है.

नतीजा साफ है, भरोसा बनता है समय के साथ

कुल मिलाकर, यह साफ होता है कि किसी देश की पुलिस फ्रेंडली मानी जाएगी या नहीं, यह सिर्फ एक घटना से तय नहीं होता, बल्कि लंबे समय की पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन से बनता है. जहां पुलिस सुधार और निगरानी तंत्र मजबूत हैं, वहां जनता का भरोसा भी मजबूत बना रहता है.

भारत में पुलिस पर भरोसा औसत से बेहतर

गैलप के लॉ एंड ऑर्डर इंडेक्स में भारत का प्रदर्शन लगातार वैश्विक औसत के आसपास या उससे थोड़ा बेहतर रहा है. हालांकि, यह इंडेक्स दुनिया की "सबसे भरोसेमंद पुलिस फोर्स" की रैंकिंग नहीं है, और भारत शीर्ष 10 देशों में शामिल नहीं है. वहीं, मार्च 2026 में लोकसभा में पेश सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में 15 मार्च तक देशभर में पुलिस हिरासत में मौत के 170 मामले दर्ज हुए। पिछले पांच वर्षों में यह संख्या हर साल 140 से 176 के बीच रही. सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इसी अवधि में केवल एक मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई दर्ज की गई. ये आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत की पुलिस व्यवस्था में जनविश्वास के कुछ सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन जवाबदेही और निगरानी के मोर्चे पर अभी भी महत्वपूर्ण सुधार की आवश्यकता है.

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