World's Largest Tank Fleet: बख्तरबंद टैंक सैन्य ताकत के सबसे मजबूत प्रतीकों में से एक हैं. इनमें भारी मारक क्षमता, गतिशीलता और युद्ध के मैदान में सुरक्षा का मेल होता है. हालांकि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों का इस्तेमाल काफी ज्यादा बढ़ चुका है लेकिन इसके बावजूद भी पारंपरिक संघर्ष में टैंक बड़ी भूमिका निभाते हैं. ग्लोबल फायर पावर रैंकिंग और सैन्य आकलन के मुताबिक चीन के पास अभी दुनिया का सबसे बड़ा एक्टिव कॉम्बैट रेडी टैंक बेड़ा है. आइए जानते हैं क्या है भारत की स्थिति.

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नंबर 1 स्थान को लेकर उलझन 

दरअसल कई रिपोर्ट में रूस को दुनिया की सबसे बड़ी टैंक शक्ति बताया जाता है लेकिन कुछ में चीन को टॉप पर रखा गया है. यह अंतर गिनती के तरीके की वजह से है. अगर रिजर्व और स्टोर किए गए टैंकों को शामिल किया जाए तो रूस 12500 से ज्यादा टैंकों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा टैंक ऑपरेटर बना हुआ है. इस आंकड़े में एक्टिव सर्विस के अलावा स्टोरेज या फिर रिजर्व डिपो में रखे हजारों वाहन शामिल है. लेकिन जब सिर्फ एक्टिव कॉम्बैट रेडी टैंक की गिनती की जाती है तो चीन लगभग 5870 ऑपरेशनल टैंक के साथ आगे निकल जाता है. यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के दौरान भारी नुकसान के बाद रूस के एक्टिव बेड़े में कमी आई है. इस वजह से वह एक्टिव टैंक क्षमता के मामले में दूसरे स्थान पर आ गया है. 

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दुनिया की सबसे बड़ी एक्टिव टैंक फोर्स 

चीन के पास अभी लगभग 5870 कॉम्बैट रेडी टैंक हैं. ये इसे दुनिया की सबसे बड़ी एक्टिव आर्म्ड फोर्स बनाते हैं. इसके फ्रंटलाइन बेड़े में एडवांस्ड टाइप 99A मुख्य युद्ध टैंक और हल्का टाइप 15 टैंक शामिल हैं. टाइप 99A मैं आधुनिक डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम और शक्तिशाली 125 एमएम गन लगी है. वहीं हल्के टाइप 15 को खासतौर पर तिब्बत और भारत चीन सीमा के पास के पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है. 

कुल मिलाकर अब तक का सबसे बड़ा टैंक भंडार 

 रिजर्व वाहनों की गिनती करने पर रूस के पास अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा कल टैंक भंडार है. इसके एक्टिव फ्लीट में लगभग 5630 टैंक हैं. इनमें T-90M Proryv, T-80BVM और एडवांस्ड T-14 Armata शामिल हैं. 

T-14 Armata रूस के सबसे बड़े टैंक प्रोजेक्ट में से एक है. इसमें बिना क्रू वाला बुर्ज और हल के अंदर सुरक्षित क्रू कम्पार्टमेंट हैं. यूक्रेन में नुकसान के बावजूद रूस अपने बड़े रिजर्व स्टॉक की वजह से दुनिया की सबसे मजबूत आर्मर्ड ताकतों में से एक बना हुआ है.

संख्या के दम पर ताकत 

उत्तर कोरिया के पास लगभग 4895 टैंकों का एक्टिव फ्लीट है. इसके मुख्य टैंकों में Chonma-ho सीरीज और M2020 डिजाइन शामिल है. हालांकि में से कई प्लेटफार्म पुराने सोवियत युग के कॉन्सेप्ट पर आधारित हैं लेकिन उत्तर कोरिया आधुनिक टेक्नोलॉजी के बजाय संख्यात्मक बढ़त पर ज्यादा निर्भर करता है. 

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संयुक्त राज्य अमेरिका 

संयुक्त राज्य अमेरिका लगभग 466 सक्रिय टैंक ऑपरेट करता है. Abrams दुनिया के सबसे काबिल मेन बैटल टैंकों में से एक माना जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें डिप्लॉयड यूरेनियम आर्मर, एडवांस्ड थर्मल इमेजिंग सिस्टम और काफी सटीक फायर कंट्रोल टेक्नोलॉजी है.

भारत दुनिया में पांचवें स्थान पर 

भारत के पास अभी लगभग 3913 एक्टिव कॉम्बैट टैंक हैं. ये इसे दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी टैंक ताकत बनाते हैं. इसके आर्मर्ड फ्लीट में मुख्य रूप से T-90 Bhishma, T-72 Ajeya  और स्वदेशी Arjun Mk-1A शामिल हैं. Arjun Mk-1A मैं डीआरडीओ द्वारा विकसित कंचन आर्मर और एडवांस्ड हंटर किलर क्षमताएं हैं. यह इसे भारत के सबसे आधुनिक स्वदेशी कॉम्बैट प्लेटफॉर्म में से एक बनाता है.

भारत को लद्दाख में काफी ऊंचाई वाले इन इलाकों में टैंक तैनात करने से एक खास ऑपरेशनल फायदा भी मिलता है. भारतीय सेना ने 14,500 फीट से ज्यादा ऊंचाई और -40 डिग्री सेल्सियस तक के कम तापमान में T-90 और T-72  टैंकों का सफलतापूर्वक संचालन किया है.

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