Special Intensive Revision: गुरुवार को चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियां के विशेष सारांश पुनरीक्षण यानी एसएसआर का निर्देश दिया. यह निर्देश हाल ही में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के चल रहे विवाद के बीच आया है. आपको बता दें कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब गोवा और उत्तराखंड राज्य एसएसआर प्रक्रिया में शामिल हैं.
इस घोषणा के बाद ये सवाल उठने लगे हैं कि आखिर दूसरे देशों में भी क्या मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया जाता है और कौन से प्राधिकरण इस प्रक्रिया की देखरेख करते हैं? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब.
संयुक्त राज्य अमेरिका
भारत की तरह संयुक्त राज्य अमेरिका में कोई एक केंद्रीय चुनाव आयोग नहीं है. इसके बजाय हर राज्य के अपने खुद के नियम हैं. आमतौर पर राज्यों के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट और स्थानीय काउंटी चुनाव बोर्ड मतदाता सूचियों के रखरखाव की देखरेख करते हैं. इस प्रक्रिया में निष्क्रिय मतदाताओं, दूसरी जगह चले गए लोग और मृत व्यक्तियों के रिकॉर्ड को हटाना शामिल होता है. इस वजह से यहां कोई एक राष्ट्रीय चुनाव प्राधिकरण नहीं होता बल्कि राज्यों के मुताबिक जिम्मेदारियां और प्रक्रियाएं अलग-अलग होती हैं.
यूनाइटेड किंगडम
यूनाइटेड किंगडम में स्थानीय सरकार के मतदाता पंजीकरण अधिकारी चुनाव आयोग की देखरेख में मतदाता पंजीकरण का प्रबंधन करते हैं. उनकी सालाना प्रक्रिया को एनुअल कैनवस कहा जाता है. हर साल परिवारों को एक फॉर्म दिया जाता है या फिर ऑनलाइन सुविधा दी जाती है. ऐसा इसलिए ताकि वे यह जांच सकें कि उसे पते पर रहने वाले पात्र मतदाताओं की जानकारी सही है भी या फिर नहीं. इससे स्थानीय अधिकारियों को परिवारों की स्थिति में हुए बदलावों का पता लगाने और पंजीकरण रिकॉर्ड को अपडेट रखने में मदद मिलती है.
ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया में मतदाता पंजीकरण की जिम्मेदारी ऑस्ट्रेलियाई चुनाव आयोग की है. इस देश में मतदान करना कानूनी रूप से जरूरी है. ऑस्ट्रेलिया चुनाव आयोग मतदाता सूची की जानकारी को अपडेटेड रखने के लिए कंटीन्यूअस रोल अपडेट प्रकिया का इस्तेमाल करता है.
इसके लिए वह अन्य सरकारी डेटाबेस, जैसे ड्राइविंग लाइसेंस और टैक्स रिकॉर्ड का सहारा लेता है. इस तरीके से जानकारी को समय-समय पर होने वाले किसी बड़े राष्ट्रीय सत्यापन अभियान पर निर्भर रहने के बजाय लगातार अपडेट किया जाता रहता है.
कनाडा
कनाडा में इलेक्शंस कनाडा नाम की एक स्वतंत्र संस्था मतदाता पंजीकरण का प्रबंधन करती है. यह देश राष्ट्रीय मतदाता रजिस्टर के नाम से एक स्थायी डेटाबेस बनाए रखता है. इसे अपडेट करने के लिए इलेक्शन कनाडा प्रांतीय और संघीय डेटासेट का मिलान करता है. इसका उद्देश्य मतदाता सूचियों को अपडेट रखना है.
भारत में मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया
भारत में यह जिम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग और अलग-अलग राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की होती है. स्थानीय स्तर पर बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन करते हैं. यह अधिकारी मतदाता सूची में दर्ज नाम और विवरणों की सटीकता की जांच करने में मदद करते हैं.
विशेष अभियानों के तहत मतदाता सूचियों का शुरू से दोबारा सत्यापन किया जा सकता है. इनका मुख्य उद्देश्य अयोग्य, मृत या फिर दूसरी जगह चले गए मतदाताओं के नाम हटाना है और साथ ही यह पक्का करना है कि सभी योग्य नागरिक सूची में शामिल हों.
यह भी पढ़ें: नवंबर में दिल्ली में ही क्यों बढ़ता है प्रदूषण, किसी और शहर में क्यों नहीं?
अलग-अलग प्रणालियां
इन उदाहरणों से पता चलता है कि मतदाता सूची में संशोधन सिर्फ भारत में ही नहीं होता. संयुक्त राज्य अमेरिका में यह काम राज्य और स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा किया जाता है. यूनाइटेड किंगडम में स्थानीय पंजीकरण अधिकारी और वार्षिक सर्वेक्षण का इस्तेमाल होता है. इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया अपने निर्वाचन आयोग के जरिए से लगातार रिकॉर्ड अपडेट करता है और कनाडा सरकारी डेटासेट का इस्तेमाल करके एक स्थायी रजिस्टर बनाए रखता है. भले ही तरीके अलग-अलग हों लेकिन हर प्रणाली का लक्ष्य मतदाताओं के विश्वसनीय रिकॉर्ड बनाए रखना है. भारत में अभी चल रही प्रकिया 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हो रही है.
यह भी पढ़ें: भारत में सबसे पहला नोट कब छपा था, जानें कितने की थी यह करेंसी?
