First Banknote in India: भारत में कागजी मुद्रा का इतिहास लगभग 250 साल पुराना है. इसकी शुरुआत औपनिवेशिक काल के दौरान निजी बैंकिंग पहलों से हुई थी. हालांकि भारत में सिक्कों का चलन सदियों पुराना रहा है लेकिन कागजी नोटों की शुरुआत ब्रिटिश शासन के तहत बैंकिंग संस्थानों के विकास के साथ हुई.
भारत में पहली कागजी मुद्रा बैंक ऑफ हिंदुस्तान द्वारा जारी की गई थी. इसकी स्थापना 1770 में कोलकाता में हुई थी.
निजी और प्रेसीडेंसी बैंक
ईस्ट इंडिया कंपनी के आने और मुगल साम्राज्य के पतन के बाद एजेंसी हाउस और निजी बैंक भारत की बदलती वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बन गए. बैंक ऑफ हिंदुस्तान के अलावा बंगाल और बिहार में जनरल बैंक ने 1773 से 1775 के बीच नोट जारी किए, और इसी के साथ बंगाल बैंक ने 1784 से 1791 के बीच ऐसा किया.
इन शुरुआती नोटों को ईस्ट इंडिया कंपनी की सरकार द्वारा लीगल टेंडर का दर्जा प्राप्त नहीं था. ये निजी प्रॉमिसरी नोट के रूप में काम करते थे और इनका इस्तेमाल सीमित स्तर पर ही होता था. बाद में तीन प्रमुख अर्ध सरकारी प्रेसीडेंसी बैंकों के जरिए से कागजी मुद्रा का विस्तार हुआ. 1806 में बैंक ऑफ बंगाल, 1840 में बैंक ऑफ बॉम्बे और 1843 में बैंक ऑफ मद्रास की स्थापना हुई. इनके नोट पर अक्सर व्यापार से जुड़ी तस्वीरें या ब्रिटिश शासन से जुड़े प्रतीक चिन्ह होते थे.
पेपर करेंसी एक्ट के तहत सरकारी कंट्रोल
1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश क्राउन ने भारत पर सीधा कंट्रोल ले लिया. 1861 के पेपर करेंसी एक्ट का उद्देश्य जाली नोटों को रोकना और मौद्रिक प्रणाली को मजबूत करना था. इसने निजी और प्रेसीडेंसी बैंकों से नोट जारी करने का अधिकार छीन लिया और यह शक्ति पूरी तरह से भारत सरकार को सौंप दी. भारत के पहले वित्त सदस्य सर जेम्स विल्सन ने इस प्रणाली को लागू करने में बड़ी भूमिका निभाई.
1861 में पहली आधिकारिक सरकारी बैंक नोट श्रृंखला आई. इसे क्वीन विक्टोरिया सीरीज के नाम से जाना जाता है. इन नोटों पर ब्रिटिश महारानी की तस्वीर होती थी और यह आमतौर पर यूनिफेस होते थे. यानी ये सिर्फ एक ही तरफ छपे होते थे.
उस वक्त सुरक्षा के तरीके काफी अनोखे थे. नोटों को दो टुकड़ों में काटकर अलग-अलग डाक से भेजा जाता था. दूसरा हिस्सा तभी भेजा जाता था जब पहले हिस्से के मिलने की पुष्टि हो जाती थी. पैसे पाने वाले लोग इन हिस्सों को छोड़कर अपनी रकम का दावा करते थे. यह तरीका 1867 तक चला.
1938 में रिजर्व बैंक का पहला नोट
भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई. यह मुद्रा प्रबंधन के लिए केंद्रीय प्राधिकरण बना. 1 जनवरी 1938 को इसने अपना पहला बैंक नोट जारी किया. यह बैंक नोट ₹5 का था. इस नोट पर उसे समय के ब्रिटिश शासन किंग जॉर्ज VI की तस्वीर थी.
आरबीआई के पहले गवर्नर सर ऑस्बोर्न स्मिथ ने अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी बैंक नोट पर साइन नहीं किया. यही वजह है कि 1938 में जारी किए गए आरबीआई का पहले नोटों पर दूसरे गवर्नर सर जेम्स टेलर के हस्ताक्षर थे. इस साल जून तक आरबीआई ने 10, 100, 1000 और 10000 के नोट भी जारी कर दिए.
आजादी के बाद की मुद्रा
भारत की आजादी के बाद बैंक नोटों से ब्रिटिश शासकों की तस्वीर हटने लगी. 1949 में आजाद भारत का पहला बैंक नोट ₹1 का नोट जारी किया गया. इसमें किंग जॉर्ज VI की तस्वीर की जगह भारत के राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को शामिल किया गया.
1957 में एक बड़ा बदलाव आया जब भारत ने दशमलव प्रणाली को अपनाया. इससे पहले ₹1 में 16 आने होते थे, हर आने में चार पैसे होते थे और हर पैसे को तीन पाइयों में बांटा गया था. इसका मतलब था कि ₹1 में कुल 192 पाई होती थी. नई प्रणाली के तहत ₹1 को 100 पैसे में बांट दिया गया.
महात्मा गांधी सीरीज
महात्मा गांधी की तस्वीर वाला एक स्मारक बैंक नोट पहली बार 1969 में जारी किया गया था. 1996 से महात्मा गांधी सीरीज के तहत सभी आम नोटों पर गांधी जी की मुस्कुराती हुई तस्वीर शामिल की जाने लगी.
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