Delhi Pollution:  बारिश का हालिया दौर खत्म होने के साथ ही दिल्ली में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ना शुरू हो चुका है. शनिवार शाम तक 12 इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी कि AQI 200 को पार कर गया. इससे वे खराब श्रेणी में आ गए. प्रभावित जगहों में आवासीय पड़ोस और भारी यातायात वाले क्षेत्र शामिल हैं. यह बढ़ोतरी एक बड़ा सवाल उठाती है कि दिल्ली में आखिर नवंबर के दौरान ही इतना गंभीर प्रदूषण क्यों होता है और कुछ दूसरे शहरों में समस्या कम क्यों दिखाई देती है. 

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इसका जवाब भूगोल, मौसमी मौसम और मानव गतिविधि के मेलजोल में है. दिल्ली एकमात्र प्रभावित जगह नहीं है. नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में भी इस समय के दौरान काफी गंभीर प्रदूषण होता है. हालांकि कई कारक मिलकर राष्ट्रीय राजधानी में स्थितियों को खास तौर से मुश्किल बनाते हैं. 

थर्मल इन्वर्जन प्रदूषकों को जमीन के पास फंसा देता है 

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गर्मियों के दौरान गर्म हवा ऊपर उठती है और प्रदूषक कणों को वायुमंडल में ऊपर ले जा सकती है. जैसे ही सर्दी शुरू होती है ठंडी और घनी हवा जमीन के करीब आ जाती है. यह एक थर्मल इन्वर्जन बन सकता है जिसमें ऊपर की गर्म हवा सतह के पास की हवा को ऊपर उठने से रोकती है. धुआं, धूल और दूसरे प्रदूषक ऊपर की तरफ फैलने के बजाय जमीनी स्तर के पास केंद्रित रहते हैं. यही वजह है कि अलग-अलग मौसम स्थितियों के तहत फैलने वाला उत्सर्जन शहर में जमा हो सकता है.

दिल्ली का लैंडलॉक्ड भूगोल और कमजोर हवा 

मुंबई और चेन्नई जैसे तटीय शहरों के उलट दिल्ली जमीन से घिरा हुआ है जहां समुद्री हवाएं प्रदूषित हवा को दूर ले जाने में मदद कर सकती हैं. नवंबर के दौरान दिल्ली में हवा की रफ्तार काफी कम हो सकती है और कभी-कभी लगभग स्थिर हो जाती है. जब हवा के रफ्तार सीमित होती है तो अलग-अलग स्रोतों से प्रदूषक दूर जाने के बजाय केंद्रित रहता है.

कम हवा की रफ्तार और ठंडी हवा के संयोजन से प्रदूषकों का बिखरना मुश्किल हो जाता है. यह एक वजह है कि दिल्ली गंभीर प्रदूषण का अनुभव कर सकती है. 

पराली जलाना और उत्तर पश्चिमी हवाएं 

अक्टूबर के आखिर और नवंबर की शुरुआत में पंजाब और हरियाणा में किसान रबी की फसल के लिए खेत साफ करने के लिए फसल के अवशेष जलाते हैं. इस दौरान उत्तर पश्चिम से आने वाली हवाएं धुआं दिल्ली की तरफ ले जा सकती हैं. जब यह धुआं शहर में पहुंचता है तो यह मौजूदा प्रदूषण के बोझ को और बढ़ा देता है.

दिल्ली की मौसमी वायु गुणवत्ता समस्याओं के लिए एकमात्र वजह के बजाय प्रणाली जालना कई वजहों में से एक है. इसका प्रभाव जलने के समय, हवा की दिशा और मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है. 

वाहन, निर्माण धूल और उद्योग 

दिल्ली को वाहनों, निर्माण संबंधी धूल और औद्योगिक गतिविधियों से भी काफी ज्यादा उत्सर्जन का सामना करना पड़ता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक शहरों में ज्यादातर दूसरे शहरों की तुलना में इन प्रदूषण के जरियों की सांद्रता ज्यादा है. जिन दिनों हवा की रफ्तार तेज होती है कुछ उत्सर्जन फैल सकता है. हालांकि नवंबर में कमजोर हवाएं उन्हें शहर में फंसा सकती हैं जिससे दिल्ली के बाहर से आने वाला प्रदूषण बढ़ सकता है. 

दिवाली की आतिशबाजी प्रदूषण बढ़ाती है 

दिवाली नवंबर के आसपास आती है और पटाखे खतरनाक बारूद और रसायनों वाला धुआं छोड़ सकते हैं. यह अतिरिक्त प्रदूषण पहले से ही प्रदूषित हवा को और ज्यादा जहरीला बना सकता है. इस वजह से त्योहार का समय दूसरे मौसमी कारकों के साथ मेल खा सकता है. इसमें पराली जलाना, ठंडी हवा और कम हवा की रफ्तार शामिल है.

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दिल्ली की स्थिति खास तौर से गंभीर क्यों? 

नवंबर में प्रदूषण में बढ़ोतरी सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं है. पंजाब और हरियाणा के क्षेत्रों के साथ-साथ नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे आसपास के शहरों को भी काफी गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. 

दिल्ली की समस्या थर्मल इन्वर्जन, लैंडलॉक्ड ज्योग्राफी, वाहन उत्सर्जन, निर्माण धूल, उद्योग और दिवाली आतिशबाजी के संयुक्त प्रभाव से पैदा होती है.

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