भारत में अब वह दौर जा चुका है, जब लोग बोतल पर सिर्फ ब्रांड का नाम देखकर शराब खरीद लेते थे. आज की नई पीढ़ी पढ़ी-लिखी और समझदार हो चुकी है, उसको इस बात से बिल्कुल मतलब होता है कि उसके गिलास में जो ड्रिंक है वो कैसे बनी है और उसका इतिहास क्या है. यही वजह है कि प्रीमियम शराब की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन आज की तारीख में व्हिस्की की बोतल पर लिखे तीन शब्द सिंगल माल्ट, प्योर माल्ट और ब्लेंडेड व्हिस्की को लेकर लोगों में काफी उलझन रहती है. आइए तीनों के बीच के अंतर को समझ लेते हैं.

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क्या होता है सिंगल माल्ट?

व्हिस्की को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यह फैला है कि सिंगल माल्ट का मतलब किसी एक लकड़ी के ड्रम या बैरल में बनी शराब होती है, जबकि विज्ञान और कूटनीति के हिसाब से ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. सिंगल माल्ट व्हिस्की को बनाने के लिए सौ प्रतिशत सिर्फ माल्टेड बारले यानि अंकुरित जौ का इस्तेमाल किया जाता है. यहां सिंगल शब्द का सीधा मतलब यह है कि इस पूरी शराब को किसी एक कारखाने यानि डिस्टिलरी के अंदर तैयार किया जाता है. इसे पारंपरिक तांबे के बर्तन में उबाला जाता है और तीन साल तक उसे ड्रम में पकाया जाता है.

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सिंगल माल्ट में मौसम का असर

सिंगल माल्ट व्हिस्की अपने बेहद कड़क, बोल्ड और अनोखे स्वाद के लिए दुनिया में जानी जाती है. इसमें बाहर का कोई दूसरा फ्लेवर या सस्ती स्पिरिट नहीं मिलाई जा सकती. भारत के लिहाज से देखें तो यहां का गर्म मौसम इस व्हिस्की को लकड़ी के ड्रमों के साथ तेजी से रासायनिक प्रक्रिया करता है. इसीलिए सिंगल माल्ट व्हिस्की में खास तरह का ट्रॉपिकल फ्रूट फ्लेवर और गहरा सोंधा स्वाद निकलकर आता है, जिसकी मांग अब विदेशों तक है.

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प्योर माल्ट का फॉर्मुला

प्योर माल्ट व्हिस्की को शराब की दुनिया में ब्लेंडेड माल्ट के नाम से भी पुकारा जाता है. यह कैटेगरी उन लोगों के लिए एकदम सटीक मानी जाती है, जो कि माल्ट व्हिस्की का असली और कड़क स्वाद तो चखना चाहते हैं, लेकिन उसमें संतुलित स्वाद की उम्मीद भी रखते हैं. यह भी सिंगल माल्ट की तरह पूरी तरह से अंकुरित जौ से तैयार की जाती है और इसे भी तांबे के बर्तन में तीन साल तक रखकर पकाया जाता है, लेकिन इसे बनाने के तरीके में छोटा तकनीकी बदलाव होता है. 

डिस्टिलरी के मेल का दिलकश कमाल

प्योर माल्ट और सिंगल माल्ट में सिर्फ इतना अंतर होता है कि प्योर माल्ट को बनाते वक्त दो या दो से ज्यादा अलग-अलग कारखानों में बनी माल्ट को आपस में एक निश्चित मात्रा के साथ मिलाया जाता है. अलग-अलग जगहों की व्हिस्की को एक साथ मिक्स करने से इसके एक्सपर्ट्स डिस्टिलर्स को ऐसा नया स्वाद देने का मौका मिल जाता है, जो कि पीने में स्मूथ और हर बार एक जैसा ही लगता है. इसलिए हर मौसम में इसका स्वाद एकसमान होता है.

ब्लेंडेड व्हिस्की की भारी मांग

पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा बेची जाने वाली और पार्टियों में कॉकटेल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली सबसे लोकप्रिय कैटेगरी ब्लेंडेड व्हिस्की ही है. बाजार में इसके ग्राहकों की संख्या सबसे ज्यादा है. इस व्हिस्की को बनाने का मेन उद्देश्य किसी खास जगह का पारंपरिक स्वाद देना नहीं होता है, बल्कि आम उपभोक्ताओं को बेहद किफायती दाम पर आसान, हल्का और स्मूथ स्वाद देना होता है. इसीलिए आम शादियों और पार्टियों में सबसे ज्यादा इसी कैटेगरी की बोतलें देखने को मिलती हैं. 

कैसे बनती है ब्लेंडेड व्हिस्की?

ब्लेंडेड व्हिस्की को तैयार करने के लिए मास्टर ब्लेंडर सिंगल माल्ट के साथ ग्रैन व्हिस्की को आपस में मिलाया जाता है. ग्रैन व्हिस्की का मतलब होता है मक्का, गेहूं या राई जैसे अलग-अलग अनाजों से तैयार की गई शराब. इसे लगातार चलने वाले स्टिल्स में डिस्टिल किया जाता है. इसके बाद एक्सपर्ट्स कई पुरानी स्पिरिट्स को एक साथ मिलाकर इसके भारीपन और तीखेपन को काफी हद तक कम करते हैं. फसल और मौसम कैसा भी हो ब्लेंडेड व्हिस्की की हर बोतल का स्वाद सालों-साल एक जैसा ही होता है.

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