सदी की सबसे बड़ी वैज्ञानिक प्रगति के बाद भी आज हमारे देश में अलग-अलग तरह के अंधविश्वास और भ्रम मौजूद हैं. सूर्य ग्रहण को लेकर तो सबसे ज्यादा भ्रम फैलाया जाता है. इसका सबसे ज्यादा डर हिंदू धर्म में गर्भवती महिलाओं के मन में बैठा दिया जाता है. यहां अक्सर यह दावा किया जाता है कि ग्रहण देखने से पेट में पल रहा बच्चा बौना पैदा हो सकता है, या फिर उसे कोई शारीरिक दोष हो सकता है. चिकित्सा विज्ञान और दुनियाभर के वैज्ञानिक इस बात को सिरे से खारिज करते हैं. आइए जानते हैं कि इस बात के पीछे आखिर कितनी सच्चाई है.

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अंधविश्वास vs आधुनिक विज्ञान

सूर्य ग्रहण के दौरान बच्चे के विकास और उसकी लंबाई पर पड़ने वाले असर को लेकर जो भी बातें कही जाती हैं, सब पूरी तरह से मनगढंत और पौराणिक कहानियों पर आधारित हैं. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में ऐसा कोई प्रमाण मौजूद नहीं है, जो इस बात को साबित कर सके कि ग्रहण की वजह से गर्भ में पल रहे शिशु को किसी तरह का नुकसान पहुंचता है. यह एक साधारण और बहुत सामान्य खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा घूमते हुए सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है. इस दौरान ब्रह्मांड से कोई भी ऐसी जादुई या किसी तरह की खतरनाक किरणें नहीं निकलती हैं, जो कि किसी के शरीर की बनावट को बदल सकें.

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ग्रहण देखने से शरीर के किस हिस्से को खतरा?

सूर्य ग्रहण का असर भले ही गर्भ में पल रहे बच्चे पर न पड़ता हो, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप बिना किसी तैयारी के बाहर खुली आंखों से ग्रहण देखने के लिए निकल जाएं. सूर्य ग्रहण को बिना किसी विशेष सुरक्षात्मक चश्मे या सोलर फिल्टर के सीधे नग्न आंखों से देखना आपकी आंखों के लिए खतरनाक हो सकता है. ग्रहण के समय सूर्य की तेज किरणें आपको रेटिना को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर सकती हैं. इससे आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है, जिसे मेडिकल भाषा में सोलर सेटिनोपैथी कहा जाता है. 

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गर्भ में पल रहे बच्चे की लंबाई और बौनेपन का असली कारण क्या है?

किसी भी बच्चे की लंबाई कम होना, बौनापन या कोई अन्य शारीरिक समस्या होना, पूरी तरह से उसके माता-पिता जीन और गर्भावस्था के दौरान मिलने वाले पोषण पर निर्भर करता है. अगर मां को सही डाइट और खान-पान नहीं मिलेगा बच्चे का विकास पूरी तरह से प्रभावित होगा, न कि आसमान में होने वाले किसी ग्रहण से. विज्ञान साफ कहता है कि इस तरह के अंधविश्वास से दूर रहकर सिर्फ डॉक्टर की सलाह और सही खान-पान पर ध्यान देना जरूरी है.

कितनी सच पुरानी मान्यताएं?

हमारे समाज में ग्रहण को लेकर सदियों पुराने नियम और कानून चले आ रहे हैं, जैसे कि गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान चाकू, कैंची या किसी भी नुकीली चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसके अलावा ग्रहण के दौरान खाना बनाने, खाने और सोने की भी मनाही होती है. लेकिन आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि इन सभी बातों का कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है. यह सिर्फ पुराने जमाने से चली आ रही रुढ़िवादी सोच है. 

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