देश की सड़कों पर गाय, सांड़, कुत्ते और दूसरे जानवर घूमते हुए अक्सर दिख जाते हैं. कई बार यही पशु अचानक सड़क पर आ जाते हैं और गंभीर हादसों का कारण बन जाते हैं, जिनमें लोगों की जान तक चली जाती है. ऐसे मामलों में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि पीड़ित परिवार को मुआवजा आखिर कौन देगा, सरकार, पशुपालक या इंश्योरेंस कंपनी? हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर एक अहम फैसला सुनाकर स्थिति साफ कर दी है. आइए जानते हैं कि कोर्ट ने क्या आदेश दिया और अब इस तरह के मामलों में नियम क्या रहेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं अब आम हो चुकी हैं और पीड़ितों को समय पर न्याय मिलना चाहिए. यह फैसला पंजाब के एक मामले से जुड़ा है, जहां संगरूर जिले में साल 2007 में सड़क पर टहल रहे एक व्यक्ति पर आवारा सांड़ ने हमला कर दिया था, जिससे सिर में गंभीर चोट लगने के कारण बाद में उसकी मौत हो गई. मृतक की पत्नी ने न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने परिवार को राहत देते हुए चार सप्ताह के भीतर 15 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया.
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अब जिम्मेदारी किसकी, सरकार या पशुपालक?
इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इस तरह के हादसों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से सरकार और पशु के मालिक, दोनों की बनती है. कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे दुर्घटना पीड़ितों के लिए मुआवजे का एक स्थायी तंत्र तैयार करें, साथ ही पशुओं की अनिवार्य टैगिंग, उनकी निगरानी और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित करें.
इसके अलावा अदालत ने यह भी कहा कि जो लोग जरूरत पूरी होने पर अपने पशुओं को सड़क पर छोड़ देते हैं, उन्हें भी जवाब देना चाहिए. यानी अब सिर्फ सरकार पर ही नहीं, बल्कि पशु पालने वाले व्यक्ति पर भी सीधी जिम्मेदारी डाली गई है. हालांकि, अगर हादसा किसी वाहन से जुड़ा हो और गाड़ी का बीमा हो, तो मोटर व्हीकल एक्ट के तहत इंश्योरेंस कंपनी की भी भूमिका बनती है, लेकिन पशु से सीधे होने वाले हादसे में मुख्य जिम्मेदारी सरकार और पशुपालक की ही मानी गई है.
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