Ladli Behna Yojana : सरकार ने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है जिन्होंने कथित तौर पर गलत जानकारी देकर या फिर अपनी अयोग्यता को छुपा कर लाडली बहना योजना का लाभ उठाया है. दरअसल यह योजना महाराष्ट्र की माझी लाडकी बहीण योजना है. बड़े पैमाने पर ऑडिट और डेटा वेरिफिकेशन से हजारों अयोग्य लाभार्थियों की पहचान हुई है. इनमें इनकम टैक्स देने वाले, सरकारी कर्मचारी और पहचान से जुड़े धोखाधड़ी के मामले भी शामिल हैं. यही वजह कि अधिकारियों ने नियमों का पालन सख्ती से करना शुरू कर दिया है और वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. आइए जानते हैं इस योजना के तहत धोखाधड़ी के लिए जुर्माने और कानूनी नतीजों के बारे में नियम क्या कहते हैं.
सरकार पूरी रकम वसूल सकती है
लाभार्थियों की जांच करते समय अधिकारी असली गलतियों और जानबूझकर की गई धोखाधड़ी के बीच अंतर करते हैं. अगर कोई भी व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या फिर फायदा पाने के लिए तथ्यों को छुपाता है तो जिला प्रशासन के पास योजना के तहत मिली रकम वसूलने का पूरा अधिकार है. हाल ही में हुए वेरिफिकेशन अभियानों के बाद कथित तौर पर अयोग्य लाभार्थियों से जुड़े कई मामलों में वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई. इसका मकसद इस बात को पक्का करना है कि सरकारी पैसा सिर्फ उन्हीं लोगों तक जाएगा जो योजना की पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं.
लाभ तुरंत रोका जा सकता है
एक बार जब भी कोई लाभार्थी अयोग्य पाया जाता है तो बिना देरी किए प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की जा सकती है. लाभार्थी का नाम योजना के डेटाबेस से हटाया जा सकता है और आगे कोई भी पेमेंट रोकने के लिए योजना से जुड़े आधार लिंक डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर को ब्लॉक किया जा सकता है.
सरकारी कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है
अगर कोई भी सरकारी कर्मचारी, कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी या फिर आंगनवाड़ी वर्कर अपनी इनकम या फिर पात्रता से जुड़ी दूसरी जानकारी को छिपाकर लाभ लेता हुआ पाया जाता है तो अधिकारी पैसे की वसूली के साथ-साथ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर सकते हैं. जांच के नतीजों और लागू सर्विस नियम के आधार पर सस्पेंशन समेत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है.
गलत जानकारी देने पर आपराधिक आरोप लगा सकते हैं
गलत घोषणाओं के जरिए जानबूझकर सरकारी फायदा लेने पर भी लागू कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई हो सकती है. गलत जानकारी देने, जरूरी तथ्यों को छिपाने या फिर धोखाधड़ी से आर्थिक मदद लेने पर भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है. अगर संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाया जाता है तो अदालत अपराध की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर जेल की सजा और जुर्माना लगा सकती है. सजा इस बात पर निर्भर होती है कि कौन से आरोप लगाए गए हैं और जांच व ट्रायल के दौरान क्या तथ्य सामने आए हैं. जालसाजी और डिजिटल धोखाधड़ी के लिए अलग-अलग सजा का प्रावधान है.
फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल
अगर फायदा पाने के लिए नकली आय प्रमाण पत्र, फर्जी राशन कार्ड या फिर दूसरे जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता है तो अधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं. इसी तरह ऑनलाइन रिकॉर्ड में छेड़छाड़, सरकारी पोर्टल पर गलत जानकारी दर्ज करने या फिर धोखाधड़ी से बैंक खाता लिंक करने पर इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है.
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रिकवरी की कार्रवाई और एफआईआर भी हो सकती है
अगर रिकवरी के आदेश जारी होने तक भी लाभार्थी पैसे नहीं लौटाता है तो अधिकारी कानून के मुताबिक आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं. जहां जानबूझकर धोखाधड़ी का सबूत मिलता है वहां प्रशासन संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत केस भी दर्ज कर सकता है. उचित मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं और अदालती आदेशों के अधीन रिकवरी की कार्रवाई में संपत्ति जब्त करने तक की नौबत आ सकती है.
अपनी मर्जी से लाभ छोड़ना
सरकार ने उन लाभार्थियों के लिए भी एक तरीका दिया है जिन्हें पता चलता है कि वे अब पात्र नहीं हैं. जिन लोगों की इनकम टैक्स सीमा से ज्यादा हो गई है या फिर जो पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करते वे आधिकारिक लाडली बहना पोर्टल के जरिए जरूरी घोषणा पत्र जमा करके अपनी मर्जी से इस योजना का फायदा छोड़ सकते हैं.
आधिकारिक ऑडिट या फिर प्रवर्तन कार्रवाई से पहले अपनी मर्जी से लाभ छोड़ने से भविष्य के कानूनी विवादों से बचने में मदद मिल सकती है. हालांकि अधिकारियों के पास तथ्यों और लागू नियम के आधार पर व्यक्तिगत मामलों की जांच करने का अधिकार तब भी बना रहता है.
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