BSP MLA Umashankar Singh Death: बहुजन समाज पार्टी के विधायक उमाशंकर सिंह के निधन से उत्तर प्रदेश का रसड़ा विधानसभा क्षेत्र बिना किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के रह गया है. उमाशंकर सिंह रसड़ा से विधायक के रूप में अपना लगातार तीसरा कार्यकाल पूरा कर रहे थे.  उनके निधन से उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा की मौजूदगी भी खत्म हो चुकी है. अब राजनीतिक चर्चाएं संभावित उपचुनाव की तरफ अपना रुख कर चुकी हैं. कई सवाल यह उठ रहे हैं कि निर्वाचन क्षेत्र का काम कैसे जारी रहेगा और क्या मौजूदा कानून के तहत उपचुनाव अनिवार्य है? आइए जानते हैं.

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किसी विधायक की मृत्यु के बाद विधानसभा क्षेत्र का क्या होता है? 

एक बार जब किसी विधायक का निधन हो जाता है तो विधानसभा सीट अपने आप ही खाली हो जाती है. जब तक कोई नया प्रतिनिधि नहीं चुना जाता तब तक निर्वाचन क्षेत्र में कोई भी मौजूदा विधायक नहीं होता. हालांकि इसका मतलब यह नहीं होता कि सरकारी काम-काज ठप हो जाए. प्रशासनिक जिम्मेदारियां दूसरे संबंधित सरकारी विभागों के साथ-साथ जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला प्रशासन की देख-रेख में जारी रहती हैं. मौजूदा प्रशासनिक तंत्र के जरिए विकास परियोजनाएं और नियमित शासन जारी रहता है.

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जनता की शिकायतें और विकास कार्यों को कौन संभालता है? 

निर्वाचित विधायक की गैर मौजूदगी में निवासी नागरिक मुद्दों और सरकार से जुड़ी सभी शिकायतों के लिए जिला प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं. राजनीतिक हस्तक्षेप की जरूरत वाले मामलों के लिए लोग पड़ोसी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले संसद या फिर विधायकों से भी सहायता मांग सकते हैं. हालांकि अधिकारी स्वीकृत सरकारी योजनाओं को लागू करना जारी रखते हैं लेकिन रिक्ति के दौरान आमतौर पर किसी भी नए निर्वाचन क्षेत्र विशिष्ट पहल की घोषणा नहीं की जाती है जिसके लिए विधायक की सिफारिश की जरूरत होती है. 

विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि का क्या होता है?

विधानसभा सीट खाली होने के बाद विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के तहत नए आवंटन या फिर घोषणाएं आमतौर पर निलंबित कर दी जाती हैं. हालांकि जिन परियोजनाओं को विधायक की मृत्यु से पहले ही प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी हो उन्हें जिला प्रशासन की देखरेख में जारी रखा जाता है. इससे यह पक्का होता है कि चल रहे सार्वजनिक कार्य बिल्कुल भी ना रुकें.

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क्या विधायक की मृत्यु के बाद उपचुनाव अनिवार्य है? 

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 151 A के तहत चुनाव आयोग को आमतौर पर किसी भी विधायक की मृत्यु या फिर इस्तीफे की वजह से खाली होने वाले पद के लिए 6 महीने के अंदर उपचुनाव कराने की जरूरत होती है. हालांकि यह नियम विधानसभा के बचे कार्यकाल के आधार पर कुछ अपवादों के अधीन है.

वर्तमान उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 में पूरा होने वाला है. अब क्योंकि उमाशंकर सिंह का निधन अगस्त 2026 में हुआ है इस वजह से विधानसभा का कार्यकाल 1 साल से भी कम बचा है. चुनाव कानून के मुताबिक अगर बचा कार्यकाल 1 साल से कम है तो चुनाव आयोग के पास उपचुनाव को छोड़ने का विवेकाधिकार होता है. ऐसे में अगले विधानसभा चुनाव तक सीट खाली रह सकती है. 

उमाशंकर सिंह का राजनीतिक सफर और विरासत 

उमाशंकर सिंह उत्तर प्रदेश में सबसे प्रमुख बसपा नेताओं में से एक थे. उन्होंने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी के एकमात्र विजयी उम्मीदवार बनकर इतिहास रचा था. उन्होंने 2012, 2017 और 2022 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद लगातार तीन बार रसड़ा का प्रतिनिधित्व किया. बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी के प्रति उनकी वफादारी के लिए अक्सर उनकी प्रशंसा की है. यह देखते हुए भी कि वह पार्टी की चुनावी असफलताओं के बावजूद भी प्रतिबद्ध रहे.

आपको बता दें कि उमाशंकर सिंह राजनीति में आने से पहले और उसके दौरान एक काफी सफल बिजनेसमैन भी थे. उनकी कंस्ट्रक्शन कंपनी छात्र शक्ति उत्तर प्रदेश की बड़ी निर्माण कंपनियों में से एक मानी जाती है. 

उमाशंकर सिंह के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और मायावती सहित कई दिग्गज नेताओं ने शोक व्यक्त किया है. मायावती ने उनके लखनऊ आवास पर पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि दी है.

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