PM Modi 5 Nation Tour: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास रूकावटों की वजह से पैदा हुआ भारत का एलपीजी आपूर्ति संकट अब सुधरने लगा है. स्थिति को स्थिर करने के लिए सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ाया है, आपातकालीन भंडार को मजबूत किया है और साथ ही नई आपूर्ति श्रृंखला भी सुरक्षित की हैं. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई से 20 मई के दौरान संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पांच राष्ट्रों की राजनयिक यात्रा पर निकल रहे हैं. आइए जानते हैं कि एलपीजी संकट के दौरान यह यात्रा कितनी जरूरी है.
भारत में एलपीजी संकट
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास शॉपिंग मार्गो में अस्थायी रुकावट के बाद भारत की एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला पर भारी दबाव आ गया था. क्योंकि भारत के तेल और गैस इंपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. मार्च 2026 में यह संकट खास तौर से गंभीर हो गया जब एलपीजी शिपमेंट में देरी और टैंकरों की आवाजाही में रुकावटें आईं.
घरेलू उत्पादन में भारी वृद्धि
संकट से निपटने के लिए सरकार ने घरेलू उत्पादन में काफी वृद्धि की. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक दैनिक उत्पादन लगभग 35000 टन से बढ़ाकर लगभग 54000 टन कर दिया गया है. इसी के साथ सरकार ने यह भी साफ किया है कि एलपीजी खत्म होने का कोई भी तत्काल खतरा नहीं है. भारत के पास फिलहाल लगभग 45 दिनों के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है.
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पीएम मोदी की यूएई यात्रा कितनी जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच देशों की यात्रा का पहला और सबसे जरूरी पड़ाव यूएई है. भारत अपनी तेल और गैस की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है. इससे यह संबंध रणनीतिक रूप से काफी ज्यादा जरूरी हो जाता है. इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और निवेश सहयोग पर चर्चा करने की उम्मीद है. इसी के साथ यूएई में लगभग 4.5 मिलियन भारतीय भी रहते हैं. इससे इस संबंध का आर्थिक और सामाजिक दोनों ही तरीकों से काफी ज्यादा महत्व है.
यूरोप यात्राओं के मुख्य केंद्र बिंदु
यूएई यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा करेंगे. यहां चर्चा का मुख्य केंद्र सेमीकंडक्टर, हरित हाइड्रोजन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा प्रौद्योगिकी, नवाचार और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी साझेदारियां होगी.
नीदरलैंड की यात्रा खासतौर से जरूरी है क्योंकि सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी और आईएमईसी जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भारत की रुचि लगातार बढ़ रही है. स्वीडन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और रक्षा सहयोग पर चर्चा होने की उम्मीद है. इसी के साथ नॉर्वे की यात्रा के दौरान ब्लू इकोनॉमी, समुद्री संसाधन और नवीकरणीय ऊर्जा पर खास जोर दिया जाएगा. यात्रा का अंतिम चरण इटली में संपन्न होगा. यहां रणनीतिक निवेश, रक्षा सहयोग, विज्ञान और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी पहलों पर खासतौर से ध्यान लगाया जाएगा.
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