Indian Army: आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भारत के सैन्य आधुनिकीकरण में तेजी आई है. देश अब स्वदेशी हथियारों और रक्षा प्रणालियों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है. बीते कुछ सालों में भारतीय सेना ने अपने जखीरे में कई एडवांस्ड स्वदेशी मिसाइल, तोप, टैंक, हेलीकॉप्टर और राइफल शामिल की हैं. रक्षा मंत्रालय की पॉजिटिव इंडिजनाइजेशन लिस्ट के जरिए अब 3000 से ज्यादा रक्षा उपकरणों को घरेलू उत्पादन के लिए चिन्हित किया गया है. 

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स्वदेशी मिसाइल प्रणाली 

भारत के रक्षा क्षेत्र की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक एडवांस्ड मिसाइल प्रणालियों का विकास है. आकाश मिसाइल प्रणाली एक शानदार वायु रक्षा हथियार बन गई है. यह कम दूरी पर दुश्मनों के विमान, ड्रोन और मिसाइल को रोकने में सक्षम है. इसी तरह नाग मिसाइल तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फॉरगेट श्रेणी की टैंक रोधी मिसाइल है. यह दुश्मन के भारी बख्तरबंद टैंकों को नष्ट करने के लिए डिजाइन की गई है.

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भारत ब्रह्मोस मिसाइल का भी संचालन करता है. इसे दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल में से एक माना जाता है. भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित इस मिसाइल के लैंड अटैक संस्करण का इस्तेमाल सेना द्वारा सटीक हमले के लिए किया जाता है. इसी के साथ परमाणु क्षमता से लैस अग्नि श्रृंखला भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता की रीढ़ है.

तोपखाने और रॉकेट 

भारत में स्वदेशी तोपखाने प्रणाली के क्षेत्र में भी बड़ा विकास किया है. पिनाका रॉकेट प्रणाली अब सेना की सबसे जरूरी रॉकेट प्रणालियों में से एक है.  यह सिर्फ 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकती है. इससे बड़े इलाके में दुश्मन के ठिकानों को तबाह किया जा सकता है. एक और बड़ी स्वदेशी उपलब्धि है धनुष. इसे अक्सर देसी बोफोर्स भी कहा जाता है. यह 155 एमएम की एक तोप है जिसे भारतीय तकनीक का इस्तेमाल करके विकसित किया गया है.  इसी के साथ ATAGS अपनी श्रेणी की सबसे शक्तिशाली स्वदेशी ‌तोपखाने प्रणालियों के रूप में उभरी है. सेना ने शारंग जैसी परियोजनाओं के जरिए पुरानी तोपखाने प्रणालियों को भी एडवांस किया है. 

स्वदेशी टैंक 

अर्जुन MBT अपनी भारी बख्तरबंद सुरक्षा और एडवांस्ड मारक क्षमता प्रणाली के लिए जाना जाता है. इस टैंक को खास तौर से भारतीय युद्ध क्षेत्र की स्थिति के मुताबिक ही डिजाइन किया गया है. हालांकि T-90S भीष्म मूल रूप से रूसी टेक्नोलॉजी पर आधारित है लेकिन अब इसका बड़े पैमाने पर भारत में ही निर्माण किया जा रहा है. इतना ही नहीं बल्कि भारत लद्दाख जैसे ऊंचे इलाकों और पहाड़ी सीमावर्ती क्षेत्र में तैनात करने के लिए स्वदेशी हल्के टैंक जोरावर को भी विकसित कर रहा है.

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स्वदेशी हेलीकॉप्टर 

भारत के एविएशन सेक्टर ने भी सेना को कई एडवांस्ड विदेशी प्लेटफार्म उपलब्ध कराए हैं. HAL प्रचंड को दुनिया का एकमात्र ऐसा अटैक हेलीकॉप्टर माना जाता है जो लगभग 5000 मीटर की ऊंचाई पर भी काम करने में सक्षम है. इसी तरह HAL रुद्र एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव का ही एक हथियारबंद संस्करण है. यह टोही अभियान, सैनिकों को सहायता देने और युद्ध अभियानों के लिए पूरी तरह से सुसज्जित है.

स्वदेशी छोटे हथियार 

भारत ने स्थानीय स्तर पर बनी राइफल और मशीन पिस्तौलों के साथ पैदल सेना के हथियारों को भी एडवांस करना शुरू कर दिया है. आधुनिकीकरण के प्रयास में तेजी आने से पहले INSAS राइफल कई सालों तक भारतीय सेना की मानक राइफल के रूप में अपनी सेवा देती रही हैं.

अब भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से अमेठी में नई AK-203 राइफल का उत्पादन किया जा रहा है. उम्मीद है कि यह सेना की कई टुकड़ियों में इस्तेमाल हो रही पुरानी राइफल की जगह ले लेगी.

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