Edible Oil Imports: भारत अपने खाने के तेल की जरूरत के लिए दूसरे देशों पर काफी ज्यादा निर्भर है. देश की कुल खपत का लगभग दो तिहाई हिस्सा इंपोर्ट से आता है. दुनिया भर में बढ़ती कीमतें और बढ़ता इंपोर्ट बिल अब एक बड़ी आर्थिक चिंता बन गए है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से अपील की है कि वे खाने के तेल की खपत को कम करें. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत हर महीने कितना खाने का तेल आयात करता है.
भारत का इंपोर्ट
भारत हर साल घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारी मात्रा में खाने का तेल इंपोर्ट करता है. 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक देश ने कुल मिलाकर लगभग 160 लाख टन खाने का तेल इंपोर्ट किया. इसका मतलब है कि हर महीने लगभग 13.3 लाख टन खाने का तेल इंपोर्ट किया जाता है. इंपोर्ट की मात्रा दुनिया भर की कीमतों और घरेलू मांग के आधार पर घटती-बढ़ती रहती है. उदाहरण के लिए फरवरी 2025 में आयात घटकर लगभग 9 लाख टन रह गया था और मार्च 2026 में लगभग 11.9 लाख टन आयात दर्ज किया गया.
हर महीने कितना खर्च करता है देश?
भारत के खाने के तेल के आयात से हर महीने भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाती है. मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर देश हर महीने खाने के तेल के आयात पर ₹13400 करोड़ से ज्यादा खर्च करता है. पिछले साल भारत का कुल खाने के तेल का आयात बिल लगभग ₹1.61 लाख करोड़ तक पहुंच गया था.
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पाम तेल सबसे ज्यादा होता है इंपोर्ट
सभी प्रकार के खाने के तेलों में पाम तेल भारत का सबसे ज्यादा इंपोर्ट किया जाने वाला तेल है. देश के कुल खाने के तेल के आयात में इसका योगदान लगभग 47% से 50% है. भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से पाम तेल खरीदता है. पाम तेल का इस्तेमाल पैकेट वाले खाने, स्नैक्स, रेस्टोरेंट और घरों में खाना बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह दूसरे कई खाने के तेलों के मुकाबले सस्ता होता है.
सोयाबीन तेल का इंपोर्ट भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है
भारत में सोयाबीन तेल के इंपोर्ट में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है. 2024-25 के दौरान देश ने रिकॉर्ड 5.47 मिलियन टन सोयाबीन तेल का इंपोर्ट किया. इस आपूर्ति का ज्यादातर हिस्सा अर्जेंटीना और ब्राजील से आता है.
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