khan Sir Controversy Narco Test Demand : बिहार में खान सर से जुड़े चर्चित कोचिंग विवाद में जेल से जमानत मिलने के बाद ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रौशन आनंद अपने भाई प्रिंस यादव ने खान सर पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने आरोप लगाने के साथ साथ नार्को टेस्ट कराने की मांग करते हुए कहा कि उनके भाई को इंसाफ मिलना चाहिए. इसके बाद लोगों के मन में एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि आखिर नार्को टेस्ट क्या होता है और क्या इस टेस्ट से सच सामने आ जाता है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि नार्को टेस्ट कैसे होता है, क्या सही में इंसान सच उगल देता है और इसमें खर्च कितना आता है. 

क्या होता है नार्को टेस्ट?

नार्को टेस्ट को नार्को एनालिसिस टेस्ट भी कहा जाता है, यह एक ऐसी जांच प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति को कुछ विशेष दवाएं देकर बेहोशी या हिप्नोटिक अवस्था में पहुंचाया जाता है. इस स्थिति में माना जाता है कि व्यक्ति की सोच-समझकर जवाब देने या झूठ बोलने की क्षमता कमजोर हो जाती है. इसके बाद जांच अधिकारी उससे घटना से जुड़े सवाल पूछते हैं और उसके जवाब रिकॉर्ड किए जाते हैं. इस टेस्ट में आमतौर पर सोडियम पेंटोथल या थायोपेंटोन नाम की दवा का इस्तेमाल किया जाता है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा किसी व्यक्ति को पूरी तरह सच बोलने के लिए मजबूर नहीं करती है. 

कैसे किया जाता है नार्को टेस्ट?

नार्को टेस्ट एक बड़ी मेडिकल प्रक्रिया होती है. इसे केवल विशेषज्ञों की टीम की निगरानी में किया जाता है. इसमें सबसे पहले व्यक्ति का मेडिकल फिटनेस टेस्ट किया जाता है. इसके बाद हार्ट, ब्लड प्रेशर और फेफड़ों की जांच होती है और डॉक्टर तय करते हैं कि व्यक्ति टेस्ट के लिए फिट है या नहीं, इसके साथ ही नसों के जरिए दवा दी जाती है. व्यक्ति के बेहोशी या हिप्नोटिक की स्थिति में पहुंचने के बाद उससे सवाल पूछे जाते हैं और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है. साथ ही इस दौरान डॉक्टर लगातार उसकी फिजिकल स्थिति पर नजर रखते हैं. 

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क्या सही में इंसान सच उगल देता है?

नार्को टेस्ट को पूरी तरह सटीक नहीं माना जाता है. कई मामलों में लोगों ने गलत या भ्रमित करने वाली जानकारी भी दी है. कुछ लोग दबाव में भी जवाब दे सकते हैं. इसी वजह से अदालतें नार्को टेस्ट के नतीजों को सीधे सबूत के तौर पर एक्सेप्ट नहीं करती है. अक्सर नार्को टेस्ट से पहले पॉलीग्राफ टेस्ट किया जाता है. इसे लाइ डिटेक्टर टेस्ट भी कहा जाता है. इसमें मशीन की मदद से व्यक्ति की सांस, नाड़ी, ब्लड प्रेशर और पसीने की एक्टिविटी को रिकॉर्ड किया जाता है जिससे यह समझा जा सके कि वह सच बोल रहा है या झूठ, हालांकि पॉलीग्राफ टेस्ट भी पूरी तरह सटीक नहीं माना जाता है. 

नार्को टेस्ट में कितना खर्च आता है?

नार्को टेस्ट का खर्च अलग-अलग संस्थानों और मेडिकल जरूरतों के आधार पर अलग हो सकता है. आमतौर पर भारत में एक नार्को टेस्ट कराने में 1 लाख रुपये या उससे ज्यादा का खर्च आ सकता है. इसमें डॉक्टरों की टीम, दवाएं, मेडिकल जांच, रिकॉर्डिंग और लैब सुविधाओं का खर्च शामिल होता है. यह टेस्ट सिर्फ सरकार से मान्यता प्राप्त फोरेंसिक संस्थानों में ही किया जाता है.

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