अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी मामले पर आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर की प्रतिक्रिया सामने आई हैं. उन्होंने इस मामले में एसआईटी के गठन पर कहा कि जिसने भी ये गलती की है वो अपनी गलती माने और सारा पैसा वापस करे. जिसके बाद उसे वहां से हटा देना चाहिए, यहीं सबसे उचित होगा. उन्होंने कहा कि अगर ये मामला कोर्ट में जाता है तो आपको पता ही है कि हमारी अदालतों का क्या हाल है?

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राम मंदिर मामले पर एसआईटी का गठन

मथुरा के प्रसिद्ध अध्यात्मिक गुरू देवकीनंदन ठाकुर मध्य प्रदेश के भोपाल पहुंचे थे, जहां उन्होंने राम मंदिर चढ़ावे मामले में SIT के गठन पर ये बयान दिया. उन्होंने कहा, "मैं तो ऐसा मानता हूं, जिसने चोरी की है, अगर की है, मुझे नहीं पता कि उसने की है कि नहीं. जिसने भी की है वो अपनी गलती माने और उस धन को राम जी को वापस करे और जिनको लगता है कि मैंने चोरी की है, उनको वहां से हटा दिया जाए, कोई भी हो. 

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उन्होंने कहा कि जिसने भी भगवान राम और राम की मर्यादा का उल्लंघन किया है, उन्हें उस जगह से तुरंत हटा देना चाहिए. अगर मैं हूं तो मुझे हटा देना चाहिए और उनसे वो धन बरामद करके राम जी के हवाले कर देना चाहिए. ये इस समय न्याय है. अब ये मामला कोर्ट में आएगा और कोर्ट न्याय करेगा. हमारा कोर्ट, आप जानते हैं कि हमारी अदालतों की हालत क्या है?" 

चढ़ावा चोरी पर क्या बोले देवकी नंदन ठाकुर

एसआईटी जांच को लेकर अध्यात्मिक गुरू ने कहा कि राम जी भी प्रतीक्षा करेंगे कि मेरी दक्षिणा अभी तक नहीं आई. तब तक पता चले कि चोरी करने वाले को ही कुछ हो जाए और वो दुनिया से चला जाए. न्याय व्यवस्था ये हैं कि जो भी लोग वहां है जिन्हें मालूम है कि हमने ये गलती की है वो उस धन को वापस करें और उन्हें वहां से निकाल दिया जाए, यही सबसे उचित रहेगा. 

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एसआईटी ने 43 लोगों से की पूछताछ

बता दें कि राम मंदिर चढ़ावा मामले में यूपी सरकार के निर्देश पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है, जिसमें तीन बड़े आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया गया है. एसआईटी की टीम सोमवार को अयोध्या पहुँच चुकी हैं और इस मामले की जाँच शुरू हो गई हैं. अभी तक टीम ट्रस्ट के पदाधिकारी, एसबीआई बैंक के कर्मचारियों समेत 43 लोगों से पूछताछ की है. 

पूछताछ के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव भी मौजूद रहे. एसआईटी की टीम को 15 दिन के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी हैं. 

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