Solar Energy: सूरज हर सेकंड पृथ्वी पर काफी ज्यादा मात्रा में ऊर्जा बरसाता रहता है. वैज्ञानिकों का ऐसा अनुमान है कि हमारे ग्रह को हर समय सूरज से लगभग 174 पेटावॉट सौर ऊर्जा मिलती है. इस पैमाने को समझने के लिए एक पेटावॉट एक क्वाड्रिलियन वॉट के बराबर होता है. आसान शब्दों में कहें तो सूरज पृथ्वी को 1 घंटे में ही इतनी ऊर्जा दे देता है जितनी पूरी इंसानियत एक साल में इस्तेमाल करती है.  हर दिन हमारे सिर के ऊपर मौजूद इस असीमित ऊर्जा स्रोत के बावजूद भी इंसान अभी भी बिजली बनाने के लिए इसका काफी छोटा सा हिस्सा ही इस्तेमाल कर पाते हैं. 

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पृथ्वी तक कितनी सौर ऊर्जा पहुंचती है?

पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपरी किनारे पर हर एक वर्ग मीटर को लगभग 1361 वॉट सौर ऊर्जा मिलती है. वैज्ञानिक इस माप को सोलर कांस्टेंट कहते हैं. हालांकि यह सारी ऊर्जा असल में जमीन तक नहीं पहुंच पाती. बादल, धूल के कण, वायुमंडलीय गैस और  परावर्तन सूरज की रोशनी का एक बड़ा हिस्सा पृथ्वी की सतह को छूने से पहले ही सोख लेते हैं या फिर बिखेर देते हैं. यही वजह है कि दिन की रोशनी की आदर्श स्थिति में जमीन तक लगभग 1000 वॉट प्रति वर्ग मीटर सौर ऊर्जा पहुंचती है. दिलचस्प बात यह है कि पृथ्वी पर पहुंचने वाली सूरज की रोशनी का लगभग 30% हिस्सा बादल, बर्फ और खुद वायुमंडल द्वारा सीधे अंतरिक्ष में वापस भेज दिया जाता है.

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इंसानियत की जरूरत से कहीं ज्यादा ऊर्जा 

वैज्ञानिक अनुमानों के मुताबिक पृथ्वी हर साल लगभग 38,50,000 एक्साजूल सौर ऊर्जा सोखती है. इस बड़े आंकड़े की तुलना में पूरी इंसानियत की कुल सालाना ऊर्जा खपत सूरज के उपलब्ध ऊर्जा के 0.1% से भी कम है. यही वजह है कि अक्सर ऐसा कहा जाता है कि सूरज सिर्फ 1 घंटे में ही इतनी ऊर्जा दे देता है जिससे पूरी दुनिया की एक साल की बिजली की जरूरतें पूरी हो सकती हैं.

सौर पैनल कितनी बिजली बना सकते हैं?

आधुनिक सौर तकनीक ने घरों और उद्योगों के लिए सूरज की रोशनी को सीधे बिजली में बदलना मुमकिन बना दिया है. छत पर लगा एक वर्ग मीटर का सौर पैनल सीधी धूप में आमतौर पर लगभग 200 से 250 वॉट बिजली बना सकता है. इसी तरह भारतीय घरों में आमतौर पर लगाए जाने वाला 1 किलो वॉट का सोलर सिस्टम मौसम की स्थिति और सूरज की रोशनी के आधार पर हर दिन लगभग चार से पांच यूनिट बिजली पैदा कर सकता है. काफी बड़े पैमाने पर वैज्ञानिकों का यह अनुमान है कि पूरी दुनिया को सोलर एनर्जी से चलाने के लिए 22% क्षमता वाले सोलर पैनल की जरूरत होगी. यह लगभग 84 हजार वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैला होना चाहिए. 

 इंसान सोलर एनर्जी का पूरी तरह इस्तेमाल क्यों नहीं कर पाते?

हालांकि सूरज काफी ज्यादा एनर्जी देता है इसके बावजूद भी कुछ ऐसी व्यावहारिक सीमाएं हैं  जो इंसानों को इसका पूरी तरह से इस्तेमाल करने से रोकती हैं. सबसे बड़ी चुनौती सोलर पैनल की क्षमता है. ज्यादातर कमर्शियल सोलर पैनल अभी सूरज की रोशनी का सिर्फ 18% से 24% हिस्सा ही इस्तेमाल करने लायक बिजली में बदल पाते हैं. बाकी एनर्जी गर्मी के रूप में बर्बाद हो जाती है या फिर वापस लौट जाती है. 

एक और बड़ी समस्या यह है कि सूरज की रोशनी सिर्फ दिन के समय ही निकलती है. रात में या फिर बादल वाले मौसम में सोलर सिस्टम को बिजली की सप्लाई बनाए रखने के लिए लिथियम आयन या फिर लेड एसिड बैटरी जैसी बैट्री स्टोरेज सॉल्यूशन की जरूरत होती है. ये बैटरी अभी भी महंगी हैं और इनके लिए काफी  बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है.

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