अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को कहा कि ट्रंप प्रशासन भारत को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है और दोनों देशों के बीच साझेदारी को और गहरा करना चाहता है. ट्रंप के प्रमुख सहयोगी और राजदूत गोर ने भारत को उन शक्तियों के नए केंद्रों में से एक बताया, जिनके साथ वॉशिंगटन सक्रिय रूप से जुड़ने का प्रयास कर रहा है.

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US विदेश मंत्री ने किया था भारत का दौरा

गोर ने कहा, 'यह प्रशासन शक्ति के नए केंद्रों की पहचान कर रहा है. हम भारत की अपार संभावनाओं को समझते हैं. हम भारत की विकास क्षमता को देख रहे हैं. हम इस साझेदारी को बढ़ा रहे हैं और मजबूत कर रहे हैं.' इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल के महीनों में बिगड़े संबंधों को सुधारने के प्रयास में भारत का दौरा किया था.

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ट्रंप के बयानों ने भारत को किया हैरान

डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों ने बार-बार नई दिल्ली को परेशान किया है. उनके प्रशासन ने भारतीय सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान का समर्थन किया, कश्मीर मुद्दे में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया, व्यापार युद्ध में चीन के खिलाफ अपना रुख नरम किया और अमेरिका में भारत विरोधी बयानबाजी को बढ़ावा देने के चलते आलोचना का सामना करना पड़ा.

किन क्षेत्रों में साथ काम कर रहे भारत-अमेरिका?

तनाव के बावजूद गोर ने उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जहां दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने आईसीईटी पहल के विस्तार की ओर इशारा किया, जो मूल रूप से सेमीकंडक्टर, AI और क्वांटम तकनीक पर केंद्रित है. इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाएं, ऊर्जा और अंतरिक्ष तकनीक भी शामिल है. गोर के अनुसार इन क्षेत्रों में सहयोग का परिणाम दिखाने लगा है और निवेश दोनों देशों की तरफ से आ रहा है.

भारत ने अमेरिका में कितना निवेश किया?

उन्होंने कहा कि अमेज़न जैसी कंपनियां भारत में आ रहे लगभग 35 अरब डॉलर के निवेश का हिस्सा हैं, जबकि भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में लगभग 20 अरब डॉलर का निवेश किया है. गोर ने आगे बताया कि हर हफ्ते कोई न कोई व्यक्ति दूतावास आकर पूछता है कि क्या भारत में निवेश करना सुरक्षित है तो हम कहते हैं हां. गोर ने इस बात पर भी जोर दिया कि वॉशिंगटन स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना चाहता है और बताया कि भारत अमेरिका में बिकने वाली लगभग 40 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है.

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