Foreign Exchange Management Act: प्रवर्तन निदेशालय (ED) को विदेशी मुद्रा से जुड़े मामलों में एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है. जांच एजेंसी ने नियमों को ताक पर रखकर विदेशों में संपत्ति खरीदने वालों के खिलाफ कानूनी शिकंजा पूरी तरह कस दिया गया है. जिसमें ED को फेमा (FEMA) कानून के उल्लंघन के मामले में 8 अचल संपत्तियों (जैसे जमीन, मकान या फ्लैट) को जब्त करने के आधिकारिक आदेश मिले, जब्त की गई इन सभी संपत्तियों की कुल कीमत 27.83 करोड़ रुपये आंकी बताई जा रही है.
ED को पहले कुछ Secret Inputs मिली थीं, जिसके बाद एजेंसी ने संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी और Search Operation चलाया. जिसमें पता चला कि भारत के कुछ बेहद धनी और रसूखदार लोगों ने देश के नियमों का उल्लंधन किया, जिसमें इन लोगों ने विदेशों में पैसा भेजने के लिए कानूनी और बैंकिंग रास्तों को छोड़कर 'हवाला चैनलों' यानी अवैध रूप से नकद पैसे को एक देश से दूसरे देश भेजने का नेटवर्क का सहारा लिया था. बताया जा रहा है कि हवाला के जरिए भेजे गए इस काले धन का इस्तेमाल मुख्य रूप से दुबई (UAE) और अन्य देशों में महंगी संपत्तियां और निवेश खरीदने के लिए किया गया था.
क्या है FEMA का उल्लंघन?
बता दें कि आज के समय में लोग पढ़ाई, नौकरी, बिजनेस या निवेश के लिए विदेशों में पैसा भेजते और मंगवाते हैं. लेकिन विदेशों से होने वाले हर तरह के लेन-देन पर भारत सरकार के कुछ नियम लागू होते हैं. इन्हीं नियमों को नियंत्रित करने के लिए Foreign Exchange Management Act (FEMA) यानी फेमा कानून बनाया गया है. जिसका मकसद विदेशी मुद्रा से जुड़े लेन-देन को व्यवस्थित रखना और देश के वित्तीय हितों की सुरक्षा करना है. अगर कोई व्यक्ति या कंपनी बिना अनुमति विदेश में पैसा भेजती है, गलत तरीके से विदेशी संपत्ति खरीदती है या विदेशी मुद्रा के नियमों का पालन नहीं करती, तो उसे FEMA का उल्लंघन माना जा सकता है. हाल के वर्षों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ऐसे कई मामलों की जांच की है, जिनमें विदेशों में संपत्ति खरीदने और पैसा भेजने के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया था.
कितना विदेशी लेन-देन करने पर होता है उल्लंघन?
कई लोगों को लगता है कि कोई तय रकम पार करते ही FEMA का उल्लंघन हो जाता है, लेकिन ऐसा नहीं होता है. FEMA में केवल रकम कि बात नहीं होती है, बल्कि इसमें लेन-देन का तरीका और उसका उद्देश्य भी महत्वपूर्ण होता है. यदि कोई व्यक्ति RBI और सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार विदेश में पैसा भेजता है, तो बड़ी रकम का लेन-देन भी वैध माना जाता है. लेकिन अगर वही कई मामलों में पैसा गलत तरीके से भेजा जाता है तो और, उसकी जानकारी न दी जाए तो, ऐसे में कम रकम का लेन-देन भी उल्लंघन माना जा सकता है.
FEMA उल्लंघन पर कितनी सजा मिल सकती है?
भारत में विदेशी मुद्रा से जुड़े मामलों को संभालने के लिए FEMA (फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट यानी Foreign Exchange Management Act कानून बनाया गया है. इस कानून के तहत होने वाली कार्रवाई और जुर्माने के नियमों को समझना जरूरी है, जिसमें सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि FEMA के तहत आने वाले ज्यादातर मामले आपराधिक (Criminal) नहीं होते बल्कि वित्तीय नियमों के उल्लंघन से जुड़े होते हैं यानी 'सिविल अपराध' माना जाता है. कानून के अनुसार यदि उल्लंघन में शामिल राशि का पता लगाया जाता है तो इसमें सीधे जेल नहीं होती बल्कि संबंधित व्यक्ति पर उस रकम के तीन गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है.
इसके अलावा यदि उल्लंघन की राशि का सही अंदाजा न लग सके तो इसके लिए अधिकतम 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं यदि नियमों का उल्लंघन लगातार जारी रहता है, तो प्रतिदिन अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है. जुर्माना लगाने के अलावा, जांच अधिकारियों के पास कुछ कड़े कदम उठाने के अधिकार भी होते हैं. जैसे नियमों का उल्लंघन करके हासिल की गई विदेशी मुद्रा (Foreign Currency) को जब्त किया जा सकता है, साथ ही कई मामलों में जुड़े संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज या ब्लॉक किया जा सकता है.
नियम तोड़ने पर संपत्ति भी हो सकती है जब्त
विशेषज्ञों के अनुसार अक्सर कई लोग FEMA नियमों को हल्के में ले लेते है और सोचते हैं कि अगर उन्होंने विदेश में कोई हेरफेर या निवेश किया है, तो भारत में उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा. ऐसे में उन्हें ऐसा करना और सोतना भारी पड़ सकता है. यदि कोई व्यक्ति विदेश में नियमों के खिलाफ संपत्ति खरीदता है या विदेशी संपत्तियों और धन की जानकारी छिपाता है, तो सरकार सिर्फ विदेश ही नहीं, भारत में मौजूद उसकी संपत्ति भी जब्त कर सकती है. इसलिए सलाह दि जाती है कि विदेश में निवेश, संपत्ति खरीदने या पैसा भेजने से पहले RBI और FEMA के नियमों की पूरी जानकारी लेना जरूरी है.
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