सोशल मीडिया और वैश्विक बाजारों में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 12 अरब डॉलर का सोना बेचने की खबरों ने खूब सुर्खियां बटोरीं. हालांकि, केंद्रीय बैंक और भारत सरकार ने तुरंत सामने आकर इन दावों पर विराम लगा दिया. आरबीआई ने साफ किया कि देश का 880.52 टन का भौतिक स्वर्ण भंडार पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें कोई कमी नहीं आई है. इस विवाद के बीच यह जानना बेहद दिलचस्प है कि दुनिया के सबसे बड़े सोना खरीदारों में से एक होने के बावजूद भारत किन देशों को और किस रूप में सोने का निर्यात करता है तथा केंद्रीय बैंक संकट में किसे सोना बेच सकते हैं.

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भारत का स्वर्ण भंडार और आयात निर्भरता

सच्चाई यह है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90% सोना विदेशों से आयात करता है. भारतीय समाज में सोने की भारी मांग के चलते देश हमेशा एक बड़े खरीदार के रूप में जाना जाता है. ऐसे में केंद्रीय बैंक द्वारा घरेलू बाजार या वैश्विक स्तर पर कच्चे सोने को बेचने का कोई तुक नहीं बनता. आरबीआई अपने सुरक्षित भंडार को बढ़ाने के लिए लगातार वैश्विक बाजारों से सोना खरीदता है, न कि उसे खुले बाजार में बेचने की रणनीति पर काम करता है.

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कच्चे सोने के बजाय तैयार आभूषणों का निर्यात

भले ही भारत सरकार या आरबीआई अपने रिजर्व को न बेचते हों, लेकिन भारत से हर साल अरबों डॉलर के सोने का निर्यात जरूर होता है. ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत कभी भी कच्चा सोना (Bullion) बाहर नहीं भेजता है. इसके बजाय भारत के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार किए गए सोने के चमचमाते आभूषण दुनिया भर के बाजारों में भेजे जाते हैं. भारत का जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग वैश्विक स्तर पर अपनी नक्काशी के लिए बहुत प्रसिद्ध है.

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भारतीय आभूषणों के सबसे बड़े वैश्विक खरीदार कौन?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोने के आभूषणों के खरीदारों की एक लंबी फेहरिस्त है. इसमें सबसे पहला और बड़ा नाम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का आता है, जो भारतीय ज्वेलरी का सबसे बड़ा खरीदार देश है. इसके बाद दूसरे नंबर पर अमेरिका (USA) का नाम है, जहां भारतीय पारंपरिक डिजाइनों की भारी मांग रहती है. इन दोनों के अलावा सिंगापुर, हांगकांग, यूनाइटेड किंगडम (UK) और फ्रांस जैसे विकसित देश भी भारतीय सोने के आभूषणों के मुख्य खरीदार हैं.

अगर आरबीआई सोना बेचे तो खरीदार कौन?

अब सवाल उठता है कि अगर कभी कोई विपरीत परिस्थिति आ जाए और आरबीआई को सच में अपना सोना बेचना या गिरवी रखना पड़े, तो उसका खरीदार कौन होगा? अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, केंद्रीय बैंक आम जनता या सामान्य व्यापारियों को सोना नहीं बेचते. इस तरह के बड़े सौदे हमेशा दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (जैसे आईएमएफ), बड़े बुलियन बैंकों या फिर वैश्विक कीमती धातु बाजार के बड़े संस्थागत खरीदारों के साथ ही किए जाते हैं.

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