Highest Temperature Record in World: आज जहां भारत समेत कई देश भीषण गर्मी की चपेट में हैं, भारत के कई राज्यों में गर्मी का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से लेकर 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. वहीं एक सवाल अक्सर सबके मन में उठता है कि धरती पर इससे भी ज्यादा गर्मी कभी पड़ी है? इसका जवाब है हां.  यह बात है 113 साल पहले की, जो आज भी अपने रिकॉर्ड में कायम है. यह बात है 10 जुलाई 1913 की, जब अमेरिका के डेथ वैली में स्थित फर्नेस क्रीक इलाके में 134°F तापमान यानी 56.6667°C दर्ज किया गया था, जो किसी आग उगलती गर्मी से कम नहीं था. यह जगह समुद्र तल से नीचे स्थित है और चारों ओर ऊंचे पहाड़ों से घिरी हुई है.  

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यही वजह है कि यहां गर्म हवा फंस जाती है, जिसके कारण तापमान बहुत ऊंचा हो जाता है. आज के समय में भी सबसे गर्म स्थान की चर्चा में डेथ वैली का नाम शामिल है. वहीं 2021 में यहां पर 130°F यानी 54.4°C तक तापमान दर्ज किया गया था, जिसने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था. 

क्या 1913 का रिकॉर्ड पूरी तरह सही है?

सालों बाद, आज के दौर के कई जलवायु वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों ने इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि 1913 में इस्तेमाल किए जाने वाले थर्मामीटर और उपकरण आज के आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सेंसर्स जितने सटीक नहीं थे. उस समय जिस तरह से 'स्टीवेनसन स्क्रीन' यानी तापमान मापने वाला शेड बॉक्स का रखरखाव किया जाता था, उसमें मानवीय चूक (Human Error) की संभावना बहुत ज्यादा थी. इसके बावजूद विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) जैसी वैश्विक और राष्ट्रीय संस्थाएं अभी भी 134°F के इस रिकॉर्ड को आधिकारिक तौर पर दुनिया का सबसे अधिक दर्ज तापमान मानती हैं. माना जाता है कि जब तक किसी अंतरराष्ट्रीय जांच में इसे पूरी तरह खारिज नहीं कर दिया जाता, तब तक इतिहास की किताबों में डेथ वैली का यह रिकॉर्ड कायम रहेगा. 

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अफ्रीका में भी पड़ी थी रिकॉर्डतोड़ गर्मी

इसके अलावा दूसरे नंबर पर है उत्तरी अफ्रीका का एक छोटा सा देश ट्यूनिशिया. इसी देश में एक बेहद मशहूर और पुराना शहर है, जिसका नाम है केबिली (Kebili). यह शहर भौगोलिक रूप से दुनिया के सबसे खतरनाक और बड़े रेगिस्तान यानी सहारा मरुस्थल के ठीक किनारे पर बसा हुआ है.  यही वजह है कि इसे सहारा रेगिस्तान का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है. जहां आज से करीब 95 साल पहले इस शहर ने गर्मी का एक ऐसा रूप देखा, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.  साल 1931 में केबिली शहर का तापमान 53.1°C यानी 127.6°F तक पहुंच गया था.  यह अफ्रीका महाद्वीप पर दर्ज किए गए अब तक के Highest Recorded Temperatures में से एक है. 

इन इलाकों ने भी बनाया रिकॉर्ड

मौसम विज्ञान की दुनिया में केवल अमेरिका की डेथ वैली या अफ्रीका का केबिली ही नहीं, बल्कि हमारे एशिया महाद्वीप के भी कई ऐसे इलाके हैं, जिन्होंने रिकॉर्डतोड़ गर्मी से पूरी दुनिया को चौंका दिया था.  बता दें कि मितरिबाह (कुवैत) एशिया का सबसे गर्म कोना माना जाता है. साल 2016 में यहां का तापमान 53.9°C (129°F) दर्ज किया गया था. इस तापमान को विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) द्वारा आधिकारिक तौर पर एशिया महाद्वीप के इतिहास में दर्ज सबसे उच्चतम तापमान माना जाता है.  इसके अलावा पड़ोसी देश में भी भीषण गर्मी देखने को मिली थी.  यो बात है तुरबत, बलूचिस्तान (पाकिस्तान) कि जहां साल 2017 में यहां का पारा 53.7°C (128.7°F) तक पहुंच गया था.  पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम प्रांत बलूचिस्तान में स्थित इस शहर ने जब इस आंकड़े को छुआ, तो पूरी दुनिया के मौसम वैज्ञानिक हैरान रह गए थे. 

ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों के अनुसार इन सभी इलाकों में एक बात समान है, जो है इनकी भौगोलिक स्थिति. वहीं सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दुनिया के कई सबसे खतरनाक हीट रिकॉर्ड पिछले कुछ दशकों में ही बने हैं. ऐसे में उनका कहना है कि अगर ग्लोबल वॉर्मिंग की रफ्तार इसी तरह जारी रही, तो आने वाले वर्षों में 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान कई क्षेत्रों में सामान्य घटना बन सकता है. 

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