Water Crisis in Delhi: राजधानी दिल्ली में गर्मी बढ़ने के साथ ही एक बार फिर पानी का संकट भी चर्चा में आ गया है. राजधानी के कई इलाकों में लोगों को पानी की कमी, कम दबाव और दुषित पानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच दिल्ली की बढ़ती आबादी ने भी जल आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है. दिल्ली जल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार राजधानी की आबादी अब 2 करोड़ 30 लाख तक पहुंच चुकी है, जबकि उपलब्ध पानी और जरूरत के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है. वहीं नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के अनुसार दिल्ली के 99.8 प्रतिशत घरों तक बेहतर पेयजल सोर्स की पहुंच है, लेकिन कई इलाकों के लोग पानी की उपलब्धता और क्वालिटी को लेकर लगातार शिकायत कर रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी आबादी के लिए रोज कितने पानी की जरूरत होती है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि दिल्ली की आबादी 2 करोड़ 30 लाख हो गई है और इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए रोज कितना पानी चाहिए. 

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दिल्ली को रोज चाहिए 1380 एमजीडी पानी 

दिल्ली जल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 2.3 करोड़ की आबादी वाले शहर को रोजाना औसतन 1380 मिलियन गैलन प्रतिदिन पानी की जरूरत होती है. इसके मुकाबले राजधानी को करीब 1000 एमजीडी पानी ही उपलब्ध हो पाता है, यानी मांग और आपूर्ति के बीच लगभग 380 एमजीडी का अंतर बना हुआ है. इसी के चलते गर्मियों में पानी की मांग बढ़ने के साथ ही इलाकों में जल संकट भी बढ़ जाता है. 

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दिल्ली तक कहां से पहुंचता है पानी?

राजधानी की जल जलापूर्ति तीन प्रमुख सोर्स पर निर्भर है. दिल्ली बोर्ड के 9 वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स यमुना, गंगा और भाखड़ा नांगल सिस्टम से मिलने वाले कच्चे पानी को साफ कर लोगों तक पहुंचाते हैं. दिल्ली के कुल कच्चे पानी का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा के जरिए आने वाली यमुना नदी से मिलता है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश से अपर गंगा नहर के माध्यम से गंगा का पानी और पंजाब की ओर से भांगड़ा नांगल प्रणाली का पानी भी राजधानी की जरूरत को पूरा करता है. 

यमुना पर है राजधानी की सबसे ज्यादा निर्भरता 

यमुना नदी दिल्ली में वजीराबाद बैराज के जरिए प्रवेश करती है. यही मौजूद जल भंडारण क्षेत्र से पानी वजीराबाद और चंद्रावल जल संशोधन संयंत्र तक पहुंचाया जाता है. इसलिए जब वजीराबाद क्षेत्र में यमुना का जलस्तर कम होता है, तो इन दोनों संयंत्रों की उत्पादन क्षमता सीधे प्रभावित होती है. वहीं दिल्ली की कुल जलापूर्ति में वजीराबाद संयंत्र लगभग 110 एमजीडी और चंद्रावल संयंत्र करीब 90 एमजीडी पानी उपलब्ध कराते हैं. दोनों मिलकर राजधानी की कुल आपूर्ति का लगभग पांचवा हिस्सा पूरा करते हैं. 

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क्यों बढ़ रहा राजधानी में पानी का संकट? 

दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार वजीराबाद बैराज पर जलस्तर को नॉर्मल संचालन के लिए 674.5 फीट बनाए रखना जरूरी होता है. लेकिन हाल के दिनों में यह स्तर घटकर करीब 668.6 फीट तक पहुंच गया, जिससे दोनों जल शोधन संयंत्रों पर असर पड़ा. अधिकारियों के अनुसार इस महीने वजीराबाद संयंत्र में जल उपलब्धता 30 से 40 प्रतिशत तक घटी, जबकि चंद्रावल संयंत्र में 15 से 20 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई. इसका असर सीधा जलापूर्ति पर पड़ा और कई इलाकों में लोगों को दो दिन तक पानी नहीं मिला या फिर गंदे पानी की शिकायत के सामने आई.

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