Chor Bazaar Law: अनधिकृत बाजारों से काफी कम कीमत पर सामान खरीदना फायदे का सौदा लग सकता है लेकिन अगर वह सामान सच में चोरी का निकला तो खरीदार को कानूनी मुश्किलों का सामना भी करना पड़ सकता है. भारतीय न्याय संहिता के तहत चोरी का सामान जानबूझकर खरीदना या फिर उसका लेनदेन करना एक आपराधिक अपराध है. इसके लिए एफआईआर भी दर्ज हो सकती है, मुकदमा चल सकता है और जेल भी हो सकती है.

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कब दर्ज हो सकता है केस?

अगर कोई भी व्यक्ति यह जानते हुए या फिर यह मानने का कारण रखते हुए की सामान चोरी का है उसे खरीदता है या फिर अपने पास रखता है तो केस दर्ज किया जा सकता है.  यह अपराध मुख्य रूप से भारतीय न्याय संहिता की धारा 317 (1) के तहत आता है. यह चोरी का सामान बेईमानी से प्राप्त करने या फिर अपने पास रखने से संबंधित है. 

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नियमित लेन-देन पर कड़ी सजा 

कानून उन लोगों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करता है जो नियमित रूप से चोरी का सामान खरीदते या फिर बेचते हैं. ऐसे मामलों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 317 (2) के तहत देखा जाता है. यह चोरी के समान के नियमित लेनदेन पर लागू होती है. इस प्रावधान के तहत सजा एक बार अपराध करने की तुलना में काफी कठोर होती है. 

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कानून के तहत सजा 

धारा 317 (1) के तहत अपराधों के लिए चोरी का सामान जानबूझकर प्राप्त करने या फिर अपने पास रखने का दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को 3 साल तक की जेल, जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं. धारा 317 (2) के तहत आने वाले मामलों में कानून में उम्र कैद या फिर 10 साल तक की कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान है.

कानूनी मुश्किलों से कैसे बचें 

ग्राहक कुछ सावधानी को बरतकर अनजाने में चोरी का सामान खरीदने का जोखिम कम कर सकते हैं. हमेशा सही इनवॉइस या फिर खरीद की रसीद लेनी चाहिए, खासकर मोबाइल फोन, लैपटॉप या फिर दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसी महंगी चीज खरीदते समय. अगर कोई प्रोडक्ट उसकी सामान्य बाजार कीमत से काफी कम कीमत पर बेचा जा रहा है तो खरीदारों को सावधानी बरतनी चाहिए और उसके स्रोत की जांच करनी चाहिए. जब भी आप किसी से सीधे सेकंड हैंड सामान खरीदते हैं तो बेचने वाले की पहचान और सामान का ओरिजिनल बिल जरूर ले.

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