Moon Gravity: चांद पर साइकिल या मोटरसाइकिल चलाने का ख्याल किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लग सकता है. लेकिन यह एक दिलचस्प वैज्ञानिक सवाल भी खड़ा करता है. हालांकि चांद की कम ग्रेविटी साइकिल चलाने के लिए एकदम सही लग सकती है लेकिन वहां का कठोर माहौल ऐसी चुनौतियां पैदा करता है जिसका अनुभव पृथ्वी पर कभी नहीं हुआ. वैज्ञानिक सिद्धांतों के मुताबिक आम पेट्रोल या फिर डीजल वाली मोटरसाइकिल चांद पर बिल्कुल भी नहीं चल पाएगी. हालांकि खास तौर पर डिजाइन की गई साइकिल और इलेक्ट्रिक गाड़ियां वहां पर चल सकती हैं.

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पेट्रोल या फिर डीजल वाली मोटरसाइकिल 

आम मोटरसाइकिल के लिए सबसे बड़ी रुकावट वहां वायुमंडल का ना होना है. इंटरनल कंबशन इंजन को ईंधन जलाने और पावर बनाने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है. क्योंकि चांद पर लगभग कोई ऑक्सीजन नहीं है इस वजह से आम पेट्रोल या फिर डीजल इंजन ना तो स्टार्ट हो पाएगा और ना ही चल पाएगा. 

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काफी ज्यादा तापमान एक और बड़ी समस्या है. चांद पर दिन के समय तापमान 121 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो सकता है. इसी के साथ रात में यह -133 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे जा सकता है. ऐसे हालात पृथ्वी पर चलने वाली गाड़ियों के लिए बने फ्यूल सिस्टम, लुब्रिकेंट, इंजन के पुर्जो और बैटरी पर बुरा असर डालेंगे. 

इलेक्ट्रिक बाइक एक बेहतर विकल्प 

आप मोटरसाइकिलों के उलट इलेक्ट्रिक बाइक को चलाने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत नहीं होती. अगर एक भरोसेमंद बैटरी सिस्टम मौजूद हो तो इलेक्ट्रिक गाड़ी चांद पर चल सकती है. इसका एक असल उदाहरण पहले से मौजूद है. अपोलो मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने बैटरी से चलने वाले लूनर रोविंग व्हीकल का इस्तेमाल किया था. इससे वे चांद की सतह पर घूम पाए थे. इससे पता चलता है कि चांद के माहौल में बिजली से चलने वाली गाड़ियां इस्तेमाल की जा सकती हैं. 

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साइकिल चलाना मुमकिन 

फिजिक्स के नजरिए से चांद पर साइकिल चलाने के कुछ हैरान करने वाले रिजल्ट निकल कर आते हैं.  क्योंकि वहां पर कोई वायुमंडल नहीं है इस वजह से हवा का कोई अवरोध भी नहीं होता. इसका मतलब है कि साइकिल चलाने वाले को हवा के दबाव से नहीं लड़ना पड़ेगा और वह कम मेहनत में ही अपने रफ्तार बनाए रख सकेगा. चांद की ग्रेविटी पृथ्वी की ग्रेविटी का सिर्फ छठा हिस्सा है. यही वजह है कि चलाने वाले को अपना वजन काफी कम महसूस होगा. इस वजह से पैडल मारना आसान हो जाएगा और साइकिल को आगे बढ़ाने के लिए कम ताकत लगानी पड़ेगी.

कम ग्रेविटी में बैलेंस बनाना मुश्किल 

चांद की कम ग्रेविटी साइकिल के चलने के तरीकों को पूरी तरह से बदल देगी. अगर कोई साइकिल चलाने वाला ठीक-ठाक रफ्तार पर किसी ऊबड़-खाबड़ जगह या फिर गड्ढे से गुजरता है तो साइकिल जमीन से ऊपर हवा में काफी आसानी से उठ सकती है. ब्रेक लगाना भी काफी मुश्किल होगा. अचानक ब्रेक लगाने से पहिए जाम हो सकते हैं और साइकिल धूल भरी सतह पर दूर तक फिसल सकती है.

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