मध्य प्रदेश के सीहोर जिला अस्पताल के संवेदनशील पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट विंग में बीती देर रात मर्यादा और सुरक्षा की धज्जियां उड़ गईं. जहां मासूम बच्चों की सांसें बचाने के लिए सन्नाटा और संजीदगी होनी चाहिए थी, वहां आधी रात को लात-घूंसे और गाली-गलौज गूंज रहे थे.

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विवाद किस बात पर हुआ, जिसे लेकर मरीज के अटेंडर और अस्पताल का स्टाफ आमने-सामने आए, इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है. देखते ही देखते विवाद इतना हिंसक हो गया था कि दोनों पक्षों के बीच झूमाझटकी हुई और एक-दूसरे के कपड़े तक तार-तार हो गए.

वार्ड में मची चीख-पुकार, मौके पर पहुंची पुलिस

इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और मारपीट से पूरे विंग में हड़कंप मच गया. बीमार बच्चों के परिजन खौफ में आ गए. सूचना मिलते ही पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और जैसे-तैसे मामले को शांत कराया.

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हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर और हिंसक वारदात के बाद भी मामला ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है. सुलगते सवालों के बीच जानकारी है कि दोनों पक्षों ने पुलिस को सिर्फ शिकायती आवेदन थमाकर खानापूर्ति कर ली है.

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मामले में सिर्फ आवेदन क्यों, FIR और गिरफ्तारी क्यों नहीं?

उल्लेखनीय है कि सरकारी अस्पताल में न तो स्टाफ सुरक्षित है और न ही मरीजों के परिजन. आखिर कब तक सीहोर जिला अस्पताल इस तरह की गुंडागर्दी और अव्यवस्था का अड्डा बना रहेगा. पुलिस और प्रशासन इस मामले में सिर्फ आवेदन लेकर क्यों बैठा है, एफआईआर और गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? मामले में शासकीय जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ यूके श्रीवास्तव ने कहा कि मामले में पूरी जानकारी एकत्र की जा रही है, आवश्यक कार्रवाई करेंगे.

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