Snake Blood: कई एशियाई देशों में सदियों से पारंपरिक दवाओं और सांस्कृतिक रीति रिवाजों के तौर पर सांप के खून और उससे बनी ड्रिंक्स का सेवन किया जाता रहा है. सुनने में यह भले ही खतरनाक लगे लेकिन कई लोगों को यह जानकर हैरानी होगी कि सांप का खून पीने से हमेशा जहर नहीं फैलता. इसकी वजह यह है कि इंसानी पाचन तंत्र सांप के जहर और खून को किस तरह प्रोसेस करता है. चीन, वियतनाम, हांगकोंग और इंडोनेशिया जैसे देशों में सांप के खून, मांस और यहां तक कि सांप वाली वाइन का सेवन करने की परंपराएं हैं. 

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सांप का खून इंसानों की जान क्यों नहीं लेता?

इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सांप का जहर तभी खतरनाक होता है जब वह काटने या फिर घाव के जरिए सीधे खून में मिलता है. जब इसे निगला जाता है तो शरीर जहर के साथ अलग तरह से व्यवहार करता है.

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पेट का एसिड जहर को बेअसर कर देता है 

सांप का जहर मुख्य रूप से प्रोटीन और एंजाइम से बना होता है. पेट में पहुंचने पर पाचन में मदद करने वाले शक्तिशाली एसिड खासकर हाइड्रोक्लोरिक एसिड इन प्रोटीनों को वैसे ही तोड़ देते हैं जैसे किसी दूसरे भोजन को. यही वजह है कि जहर अपने जहरीले गुण खो देता है और पच जाता है.

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जहर का खून में मिलना जरूरी 

गंभीर नुकसान पहुंचाने के लिए जहर का आमतौर पर सांप के काटने से सीधे खून या फिर शरीर के टिशूज में पहुंचना जरूरी होता है. अगर किसी व्यक्ति के मुंह, गले या फिर पाचन नली में कोई कट, अल्सर या फिर घाव नहीं है तो निगला हुआ जहर आमतौर पर रक्त संचार प्रणाली में नहीं पहुंचता है.

सांप का खून सांप के जहर से अलग होता है 

जो लोग सांप से बनी ड्रिंक पीते हैं वे आमतौर पर शुद्ध जहर के बजाय जानवर का खून पी रहे होते हैं. कुछ पारंपरिक तरीकों में खून में थोड़ी मात्रा में जहर मिलाया जा सकता है लेकिन पाचन के दौरान यह अंश आमतौर पर बेअसर हो जाते हैं.

वे देश जहां सांप के खून का सेवन किया जाता है 

चीन में सांप के खून और मांस का सेवन पारंपरिक रूप से स्वास्थ्य टॉनिक के तौर पर किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन शक्ति बढ़ती है. वियतनाम और हांगकांग में सांप के खून को अक्सर राइस वाइन में मिलाकर स्नेक वाइन नाम की खास ड्रिंक बनाई जाती है.

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