Brihanmumbai Municipal Corporation: महाराष्ट्र की 29 नगर पालिकाओं में मेयर चुनाव हो रहे हैं. इस साल मुंबई मेयर का पद जनरल कैटेगरी की उम्मीदवार के लिए आरक्षित किया गया है और साथ ही लॉटरी सिस्टम के जरिए बीएमसी में महिला मेयर बनाने का ऐलान किया गया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि बीएमसी को असल में कौन कंट्रोल करता है और क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज में दखल दे सकते हैं. 

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बीएमसी केंद्र सरकार के नहीं महाराष्ट्र सरकार के अधीन है 

बीएमसी सीधे महाराष्ट्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में काम करता है. संवैधानिक रूप से नगर निगम जैसी शहरी स्थानीय निकाय यूनियन लिस्ट में नहीं बल्कि स्टेट लिस्ट में आती है. इसका सीधा सा मतलब हुआ कि उनके प्रशासन, फाइनेंस और गवर्नेंस की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है. कानूनी तौर पर बीएमसी मुंबई नगर निगम अधिनियम 1888 के तहत काम करती है. नागरिक प्रशासन, टैक्सेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी सेवाओं से जुड़े सभी अहम फैसले किसी केंद्रीय कानून से नहीं बल्कि इसी राज्य कानून से तय होते हैं.

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नगर आयुक्त की नियुक्ति राज्य सरकार करती है 

बीएमसी में सबसे शक्तिशाली अधिकारी मेयर नहीं बल्कि नगर आयुक्त होता है. यह अधिकारी निगम के मुख्य कार्यकारी के तौर पर काम करता है और रोजाना के प्रशासन, फाइनेंस, टेंडर और प्रोजेक्ट के लागू होने से जुड़ी सभी चीजों को कंट्रोल करता है. सबसे खास बात यह है कि नगर आयुक्त की नियुक्ति सीधे महाराष्ट्र सरकार करती है. आयुक्त प्रधानमंत्री या फिर केंद्र सरकार को नहीं बल्कि राज्य के शहरी विकास विभाग और आखिर में मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करता है. 

प्रधानमंत्री सीधे दखल क्यों नहीं दे सकते 

भारत के संवैधानिक ढांचे के तहत प्रधानमंत्री या फिर प्रधानमंत्री कार्यालय के पास किसी भी नगर निगम को सीधे आदेश जारी करने का कोई अधिकार नहीं है. ऐसा करने से केंद्र और राज्य के बीच शक्तियों के संघीय बंटवारे का उल्लंघन होगा. भले ही सीधे दखल देने की इजाजत नहीं हो लेकिन केंद्र सरकार अप्रत्यक्ष रूप से शहरी शासन को प्रभावित करती है. यह स्मार्ट सिटी मिशन, स्वच्छ भारत अभियान, अमृत और शहरी परिवहन या फिर आवास कार्यक्रमों जैसे केंद्र प्रायोजित योजनाओं के जरिए होता है. 

कुछ खास मामलों में संविधान का अनुच्छेद 256 केंद्र सरकार को संसदीय कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए किसी राज्य को निर्देश देने की अनुमति है. हालांकि यह शक्ति सिर्फ यह पक्का करती है कि राज्य केंद्रीय कानून का पालन करें.

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