22 जनवरी 2026 को कर्नाटक विधानसभा में स्पीकर यूटी खादर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, एच के पाटिल, प्रियांक खरगे, सलीम अहमद और बसवराज होरट्टी राज्यपाल थावरचंद गहलोत का इंतजार कर रहे थे. गहलोत सदन में पहुंचे और स्पीच का पेपर पढ़ना शुरू किया. लेकिन 2-4 लाइन पढ़ते ही उन्होंने कागज रख दिया. वह सदन से चले गए. बी के हरिप्रसाद ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं रुके.
कर्नाटक में राज्यपाल बनाम सरकार
22 जनवरी से शुरू हुआ विधानसभा सत्र सद्धारमैया के लिए बहुत खास है. लेकिन इससे पहले ही थावरचंद गहलोत ने विधानसभा और विधान परिषद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इनकार कर दिया था. गहलोत का कहना था कि सरकार के तैयार भाषण के कुछ हिस्सों में बदलाव जरूरी है. इस घटनाक्रम ने संवैधानिक परंपराओं और राज्यापल की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी. दरअसल, राज्यपाल को सरकार के तैयार किएगए भाषण के कुल 11 पैरा पर आपत्ति है. इनमें केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना से जुड़े मुद्दे शामिल हैं. गहलोत का कहना था कि इनको पूरी तरह हटाया जाए, जबकि सरकार इन्हें हटाने के बजाय भाषा में सीमित बदलाव करने को तैयार थी.
आज इसी वजह से राज्यपाल ने स्पीच शुरू करते ही खत्म कर दी और सदन से चले गए.
मंत्री पाटिल ने गहलोत से मुलाकात कर मनाया था
कर्नाटक के लॉ और संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने लोक भवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात की थी. मंत्री पाटिल ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 176(1) के तहत राज्यपाल का संयुक्त सत्र को संबोधित करना अनिवार्य है और यह भाषण मंत्रिपरिषद द्वारा तैयार किया जाता है. अगर भाषण में कोई आपत्तिजनक भाषा हो तो सरकार उसमें संशोधन कर सकती है, लेकिन पूरे पैरा को हटाना स्वीकार्य नहीं है.
तमिनलाडू में भी राज्यपाल सदन से निकले थे
20 जनवरी को तमिलनाडु में भी राज्यपाल आरएन रवि विधानसभा सत्र बीच में ही छोड़कर बाहर चले गए थे. सत्र के पहले दिन ही राज्यपाल और और सरकार के बीच तीखी झड़प हो गई थी. राज्यपाल ने तमिल एंथम के बाद राष्ट्रगान बजाने की मांग की थी, जिसे स्पीकर अप्पावु ने मानने से इनकार कर दिया. गवर्नर आरएन रवि ने आरोप लगाया कि राष्ट्रगान का अपमान किया गया.