BAPS Hindu Mandir Award: दुनिया में अक्सर धर्म और संस्कृति को लेकर बहस होती रहती है, लेकिन कुछ खबरें ऐसी होती हैं जो लोगों को जोड़ने का काम करती हैं.  ऐसी ही एक खबर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से सामने आई है, जहां एक हिंदू मंदिर को प्रतिष्ठित सम्मान देकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया गया है.  अबू धाबी में बने BAPS हिंदू मंदिर को 'टॉलरेंस अवॉर्ड 2026' से सम्मानित किया गया है. यह सिर्फ एक मंदिर की उपलब्धि नहीं है, बल्कि अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के बीच बढ़ते सम्मान और भाईचारे का भी प्रतीक माना जा रहा है.  इस खबर के सामने आने के बाद दुनिया भर के लोगों के बीच इसकी चर्चा शुरू हो गई है. 

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आखिर क्यों मिला यह बड़ा सम्मान?

अबू धाबी का BAPS हिंदू मंदिर अपनी खूबसूरत वास्तुकला के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान के लिए भी जाना जाता है.  बताया गया है कि इस मंदिर ने विभिन्न समुदायों के लोगों को एक साथ जोड़ने, आपसी सम्मान बढ़ाने और शांति का संदेश फैलाने में अहम भूमिका निभाई है. खास बात यह है कि यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यहां अलग-अलग देशों और धर्मों के लोग भी आते हैं और एक-दूसरे की संस्कृति को करीब से समझते हैं. यही सोच इस सम्मान की सबसे बड़ी वजह बनी.

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मंदिर की खूबसूरती देखकर हर कोई रह जाता है हैरान

अबू धाबी का BAPS हिंदू मंदिर पश्चिम एशिया का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर माना जाता है. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में कंक्रीट या स्टील जैसी धातुओं का इस्तेमाल नहीं किया गया.  पूरा मंदिर प्राचीन भारतीय शिल्पकला के अनुसार पत्थरों से तैयार किया गया है.  मंदिर के निर्माण में राजस्थान का गुलाबी बलुआ पत्थर और इटली का सफेद संगमरमर इस्तेमाल किया गया है. मंदिर में सात भव्य शिखर बनाए गए हैं, जो UAE के सात अमीरात का प्रतीक हैं.

इसके अलावा मंदिर परिसर में गंगा और यमुना के जल से बनाई गई कृत्रिम जलधाराएं भी मौजूद हैं.  साथ ही अबू धाबी का यह मंदिर भारत और UAE के बीच सांस्कृतिक रिश्तों का भी एक मजबूत प्रतीक बन चुका है. यहां आने वाले हजारों लोग केवल दर्शन ही नहीं करते, बल्कि एकता, शांति और भाईचारे का संदेश भी अपने साथ लेकर जाते हैं.  यही कारण है कि मंदिर को स्थानीय लोगों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी सराहना मिल रही है. 

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