उच्च शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाने के मकसद से बनाए गए केंद्र अब खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं. मुंबई यूनिवर्सिटी के रत्नागिरी, कल्याण और सिंधुदुर्ग में बने उप-केंद्रों में छात्रों की बेहद कम संख्या ने न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था बल्कि योजनाओं की सफलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

Continues below advertisement

बीते तीन सालों के आंकड़े बताते हैं कि इन केंद्रों पर जितनी सीटें हैं, उसके मुकाबले बहुत कम छात्र दाखिला ले रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि कई कक्षाएं खाली पड़ी हैं, जबकि इन्हें बनाने में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यह मामला 14 मार्च को हुई मुंबई यूनिवर्सिटी की सीनेट बैठक में सामने आया. बैठक के दौरान पेश किए गए आंकड़ों ने सभी को चौंका दिया. रत्नागिरी केंद्र की स्थिति सबसे ज्यादा चिंता वाली है. यहां 2024-25 सत्र में कुल 120 सीटों में से सिर्फ 10 छात्रों ने ही दाखिला लिया. अगर पिछले सालों पर नजर डालें तो गिरावट साफ दिखती है. 2022-23 में 53 छात्रों ने दाखिला लिया था, जो 2023-24 में घटकर 13 रह गया और अब 2024-25 में सिर्फ 10 पर आ गया है.

Continues below advertisement

यह भी पढ़ें -  जामिया में एडमिशन का सुनहरा मौका, 30 नए कोर्स शुरू और फीस में बड़ी राहत से छात्रों को फायदा

पुराना केंद्र, फिर भी खाली

रत्नागिरी केंद्र मुंबई यूनिवर्सिटी का सबसे पुराना उप-केंद्र माना जाता है. इसकी स्थापना 1989 में हुई थी, लेकिन यहां पढ़ाई की शुरुआत 2004-05 से हुई. इतने लंबे समय के बाद भी अगर यहां छात्र नहीं आ रहे हैं, तो यह स्थिति और भी गंभीर मानी जा रही है.

कल्याण केंद्र की हालत भी बेहतर नहीं

कल्याण में बना उप-केंद्र भी छात्रों को आकर्षित करने में पीछे है. यहां भी कुल 120 सीटें हैं, लेकिन 2024-25 में सिर्फ 11 छात्रों ने ही एडमिशन लिया. पिछले दो सालों में यह संख्या और भी कम थी. 2023-24 में 10 और 2022-23 में सिर्फ 9 छात्र ही दाखिल हुए थे. दिलचस्प बात यह है कि पास में ही ठाणे केंद्र में छात्रों की संख्या ठीक-ठाक है. इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कुछ केंद्रों में ही ऐसी समस्या क्यों हो रही है.

सिंधुदुर्ग में थोड़ी बेहतर, पर संतोषजनक नहीं

सिंधुदुर्ग केंद्र की स्थिति थोड़ी बेहतर जरूर है, लेकिन उसे भी अच्छा नहीं कहा जा सकता. यहां 80 सीटों के मुकाबले 2024-25 में सिर्फ 37 छात्रों ने दाखिला लिया. यहां दो कोर्स चलाए जा रहे हैं. मास्टर्स इन सोशल वर्क (MSW) और एमएससी आईटी. लेकिन आंकड़े बताते हैं कि छात्रों की रुचि सिर्फ MSW कोर्स में ही ज्यादा है. 2023-24 में 27 छात्रों ने एडमिशन लिया था, जिसमें से 21 MSW में थे और सिर्फ 6 एमएससी आईटी में. वहीं 2022-23 में 29 छात्रों ने दाखिला लिया और सभी MSW के थे, जबकि आईटी कोर्स में एक भी छात्र नहीं आया.

यह भी पढ़ें -  UPSC ने जारी किया ग्रेड ‘B’ पदों का रिजल्ट, अब अगले चरण की तैयारी में जुटे सफल उम्मीदवार


Education Loan Information:

Calculate Education Loan EMI