कुछ साल पहले हमारे देश में चालान के नियमों की धज्जियां उड़ा दी जाती है. लेकिन अब सरकार ट्रैफिक नियमों को लेकर बहुत सख्त हो गई है. जिसके चलते अब जो भी नियम तोड़ता है उसे चालान भरना पड़ता है. लेकिन कुछ लोगों से अनजाने में गलती हो जाती है और चालान कट जाता है. जिसके चलते सरकार समय-समय पर लोक अदालत का कराती है. जिसमें वह लोग जाकर अपना चालान माफ करवा सकते हैं.

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हालांकि लोक अदालत में भी कुछ ऐसे चालान हैं जिन्हें माफ नहीं किया जाता है. अगर आपके पास भी पुराने पेंडिंग चालान हैं और आप उन्हें लोक अदालत में निपटाने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की साबित होगी. क्योंकि आज हम आपको विस्तार से बताने जा रहे हैं कि लोक अदालत में किन गंभीर मामलों के चालान माफ नहीं होते हैं.

ड्रिंक एंड ड्राइव के चालान

बता दें कि लोक अदालत में सबसे पहले और सबसे सख्त नियम ड्रिंक एंड ड्राइव वाले मामलों पर लागू होता है. यदि किसी वाहन चालक का चालान नशे की हालत में गाड़ी चलाने पर कटा है. तो वह किसी भी स्थिति में लोक अदालत में माफ या कम नहीं किया जाएगा.

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क्योंकि ड्रिंक एंड ड्राइव का चालान बड़ा अपराध माना जाता है. जिसकी सुनवाई के लिए कोर्ट में नियमित प्रक्रिया और सख्त सजा का प्रावधान तय किया गया है. ऐसे मामलों में वाहन चालकों को कोर्ट के सामने पेश होना ही पड़ता है और किसी भी तरह की रियायत मिलने की कोई गुंजाइश नहीं होती है.

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सड़क दुर्घटना के मामले

वहीं अगर किसी वाहन से कोई गंभीर सड़क दुर्घटना हो गई है तो उससे जुड़े चालान माफ नहीं होंगे. इस तरह के सभी आपराधिक मामलों और गंभीर दुर्घटनाओं के मामलों को लोक अदालत के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाता है. क्योंकि इनमें कानूनी कार्रवाई करना अनिवार्य होता है.

जिसके चलते कोर्ट ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष और कानून के हिसाब से ही सुनवाई करता है, इसलिए एक्सीडेंट से जुड़े पेंडिंग मामलों का निपटारा इस मंच के जरिए कभी नहीं किया जा सकता है. वाहन चालकों को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि कानून व्यवस्था से जुड़े बड़े हादसों के चालान लोक अदालत में स्वीकार नहीं किए जाते हैं.

खतरनाक ड्राइविंग के चालान नहीं होते माफ

जबकि इन दोनों के अलावा सार्वजनिक सड़कों पर जानबूझकर खतरनाक तरीके से स्टंट करना बहुत ज्यादा तेज रफ्तार में गाड़ी भगाना या जिससे दूसरों की जान को सीधा खतरा पैदा हो ऐसे चालान भी माफ नहीं होते हैं. इसके अलावा यदि किसी वाहन का इस्तेमाल किसी भी तरह के आपराधिक काम को अंजाम देने में किया गया है या उस पर कोई एफआईआर दर्ज है तो ऐसे मामले में भी लोक अदालत में कोई सुनवाई नहीं है. लोक अदालत में केवल छोटे-मोटे और सामान्य ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन वाले चालानों को ही सुलझाने की अनुमति दी जाती है. जबकि गंभीर अपराध इसमें शामिल नहीं होते हैं.

इन चालानों पर मिलती है राहत

आपको बता दें कि लोक अदालत में मुख्य रूप से उन्हीं चालानों को माफ किया जाता है जो छोटे-मोटे और साधारण नियमों के उल्लंघन से जुड़े होते हैं. जैसे बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के गाड़ी चलाना. इसके अलावा रेड लाइट जंप करना, नो-पार्किंग जोन में गाड़ी खड़ी करना या सामान्य ओवरस्पीडिंग जैसे मामलों में कोर्ट द्वारा जुर्माना काफी हद तक कम कर दिया जाता है.

अगर आपके पास भी इस तरह के सामान्य पेंडिंग चालान हैं तो आप आने वाली लोक अदालत में जाकर आसानी से राहत पा सकते हैं और अपने पुराने मामलों को हमेशा के लिए बंद करवा सकते हैं.

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