हमारे देश में लाखों लोग हर दिन ऑटो से सफर करते हैं और बहुत ही आसानी से यह साधन मिल भी जाता है. लगभग देश के हर कोने में ऑटो सवारी फैला हुआ है. जिसे देख सबसे मन में सवाल आता है कि आखरिकार ऑटो चलाने में आखरिकार कमाई कितनी हो जाती है. तो बता दें कि ऑटो चलाना जितना आसान दिखता है असल जिंदगी में इसकी लागत, खर्च और कमाई का कैलकुलेशन काफी पेचीदा होता है.

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क्योंकि अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि ऑटो चलाना कितना फायदेमंद है और इसमें कितना खर्च और मुनाफा होता है. तो यह खबर आपके सभी सवालों का जवाब दे देगी. हम इस आर्टिकल में आपको ऑटो रिक्शा के बिजनेस से जुड़े सभी पहलुओं की पूरी जानकारी बहुत ही आसान भाषा में देने जा रहे हैं.

ऑटो खरीदने की लागत

आपको बता दें कि ऑटो चलाने का कारोबार शुरू करने के लिए सबसे पहले आपको एक ऑटो चाहिए. यदि आप मार्केट से नया सीएनजी या इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा खरीदते हैं तो उसकी एक्स-शोरूम कीमत लगभग तीन लाख से साढ़े तीन लाख रुपये तक होती है. कई लोग इस रकम को चुकाने के लिए बैंक से फाइनेंस या लोन लेते हैं जिसके बाद उन्हें हर महीने लगभग चार से पांच हजार रुपये की किस्त चुकानी पड़ती है.

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जबकि इसके अलावा कमर्शियल परमिट बनवाना, फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा और रजिस्ट्रेशन का शुरुआती खर्च भी इसमें जुड़ जाता है. यदि आप खुद का ऑटो खरीदने के बजाय किसी अन्य मालिक से किराए पर ऑटो लेकर चलाते हैं तो आपको रोजाना का एक तय किराया देना पड़ता है.

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डेली के खर्च और मेंटेनेंस

वहीं कुछ ऐसे खर्चे होते हैं जो ड्राइवर की जेब से हर रोज निकलते ही रहते हैं. सबसे बड़ा खर्च फ्यूल का होता है. जहां सीएनजी या बिजली की खपत के रूप में रोजाना दो से तीन सौ रुपये खर्च हो जाते हैं. इसके अलावा हर महीने ऑटो की छोटी-मोटी सर्विसिंग, मोबिल ऑयल बदलना, टायर बदलना और समय-समय पर आने वाले मरम्मत के खर्च को भी जोड़ना पड़ता है.

यदि ऑटो लोन पर है तो ईएमआई का फिक्स खर्च भी अलग से बना रहता है. ये सभी खर्चे ड्राइवर की कुल कमाई में से सबसे पहले काटे जाते हैं. जिसके बाद ही असली बचत का हिसाब सामने आता है.

कमाई का पूरा हिसाब

बता दें कि ऑटो चालकों की कमाई पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि वे किस शहर में काम कर रहे हैं और रोजाना कितने घंटे मेहनत कर रहे हैं. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या चेन्नई जैसे बड़े महानगरों में जहां सवारियों की काफी भीड़ है. इन सिटी में एक ऑटो चालक रोजाना आसानी से एक हजार से दो हजार रुपये या उससे ज्यादा की कमाई कर लेते हैं.

जबकि छोटे शहरों या कस्बों में यह कमाई घटकर पांच से आठ सौ रुपये के आसपास सिमट जाती है. यदि कोई ड्राइवर सुबह से लेकर देर रात तक कड़ी मेहनत करता है. तो महीने भर में तमाम खर्च और ईएमआई चुकाने के बाद भी वह बीस से तीस हजार रुपये या उससे ज्यादा की बचत आसानी से कर लेता है.

क्या सच में है फायदा? 

बता दें कि ऑटो रिक्शा चलाना उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है जो रोजाना मेहनत कर सकते हैं. हालांकि इसमें मुनाफा इस बात पर निर्भर करता है कि आप गाड़ी का रखरखाव कितनी अच्छी तरह करते हैं और फ्यूल की कीमतों को कैसे मैनेज करते हैं.

जबकि इसके साथ ही लगातार ट्रैफिक में रहने और शारीरिक थकान जैसी चुनौतियां भी इस काम का अहम हिस्सा हैं. यदि सही प्लानिंग और समय की पाबंदी के साथ ऑटो चलाया जाए तो यह परिवार का भरण-पोषण करने के लिए एक बहुत ही भरोसेमंद और अच्छी आमदनी देने वाला जरिया बन सकता है.

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