भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच लोग तेजी से ईवी का रुख कर रहे हैं. हालांकि, ईवी मालिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गाड़ी की ड्राइविंग रेंज को लेकर होती है, कई बार कंपनियों द्वारा दावा किया गया माइलेज असल सड़क पर नहीं मिल पाता है.
ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स और लाइव टेस्ट रिपोर्ट्स के अनुसार, इलेक्ट्रिक कार की रेंज काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आप उसे कैसे चलाते हैं. ड्राइविंग के दौरान अपनी आदतों में कुछ मामूली सुधार करके आप अपनी ईवी की रेंज को 15 से 25 प्रतिशत तक आसानी से बढ़ा सकते हैं.
स्मूथ ड्राइविंग स्टाइल और एक्सीलरेशन पर रखें कंट्रोल
इलेक्ट्रिक कारों में एक्सीलेटर दबाते ही तुरंत भारी मात्रा में टॉर्क मिलती है, जिससे गाड़ी तेजी से रफ्तार पकड़ती है. हालांकि, अचानक और तेज गति से रेस देने की यह आदत बैटरी को बहुत तेजी से खत्म करती है. रेंज को अधिकतम करने के लिए हमेशा हल्के पैरों से गाड़ी चलाएं और रफ्तार को धीरे-धीरे बढ़ाएं. अचानक ब्रेक लगाने और बार-बार तेजी से आगे बढ़ने की आदत को छोड़कर एक स्थिर गति बनाए रखने से मोटर पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता, जिससे बैटरी की लंबी उम्र और बेहतर रेंज दोनों हासिल होती है.
रीजेनरेटिव ब्रेकिंग का करें इस्तेमाल
आजकल बाजार में आने वाली लगभग सभी आधुनिक इलेक्ट्रिक कारों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम दिया जाता है. यह तकनीक एक इन-बिल्ट जनरेटर की तरह काम करती है. जब भी आप एक्सीलेटर से पैर हटाते हैं या हल्की ब्रेकिंग करते हैं, तो गाड़ी की काइनेटिक एनर्जी बिजली में बदल जाती है और बैटरी को वापस चार्ज करने लगती है.
शहर के ट्रैफिक में, जहां बार-बार गाड़ी रोकनी पड़ती है, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग को मीडियम या हाई लेवल पर सेट रखना चाहिए. इससे बार-बार ब्रेक पैड दबाने की जरूरत नहीं पड़ती और सिंगल चार्ज में कई किलोमीटर का एक्स्ट्रा माइलेज मिल जाता है.
इको मोड और क्रूज कंट्रोल का लें सहारा
ईवी निर्माता कंपनियां गाड़ियों में अलग-अलग ड्राइविंग मोड जैसे- स्पोर्ट, नॉर्मल और ईको मोड देती हैं. रोजाना के सफर में हमेशा ईको मोड का चुनाव करें. यह मोड कार की पावर डिलीवरी और एयर कंडीशनिंग की खपत को इस तरह ऑप्टिमाइज करता है कि कम से कम बिजली खर्च हो. इसके अलावा, यदि आप हाईवे पर चल रहे हैं, तो क्रूज कंट्रोल फीचर का इस्तेमाल करें. क्रूज कंट्रोल गाड़ी को एक समान गति पर रखता है, जिससे बार-बार स्पीड कम-ज्यादा होने की वजह से होने वाला पावर लॉस रुक जाता है. हाईवे पर गाड़ी की रफ्तार को 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रखना सबसे ज्यादा रेंज देता है.
यह भी पढ़ें: दुनिया की पहली AI क्रूजर बाइक, चलते-चलते चार्ज होगी बैटरी
एसी और केबिन क्लाइमेट को समझदारी से करें मैनेज
इलेक्ट्रिक कार की बैटरी सिर्फ पहियों को ही नहीं घुमाती, बल्कि कार के सभी इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स, खासकर AC और हीटर को भी पावर देती है. बहुत तेज तापमान में एसी को बेहद कम पर चलाने या अत्यधिक ठंड में हीटर को फुल ब्लास्ट पर रखने से रेंज में भारी गिरावट दर्ज की जाती है.
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि सफर शुरू करने से पहले, जब गाड़ी चार्जिंग प्लग से जुड़ी हो, तभी उसे प्री-कंडीशन कर लें. ऐसा करने से कार घर की बिजली से ठंडी हो जाएगी और सड़क पर निकलने के बाद कार की मुख्य बैटरी पर लोड नहीं पड़ेगा. सफर के दौरान एसी को ऑटो मोड या संतुलित तापमान पर ही चलाएं.
यह भी पढ़ें: हाईवे पर इमरजेंसी में नहीं लग रहा 1033, तुरंत करें ये काम
Car loan Information:
Calculate Car Loan EMI