Entry Level Cars Sales: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में अब बेहद ही बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. क्योंकि, मिडिल क्लास परिवारों का पहला सपना मानी जाने वाली एंट्री-लेवल यानी छोटी और सस्ती कारें अब बेहद ही कम बिक रही हैं.
बता दें कि, एक दौर था जब मारुति ऑल्टो या वैगनआर जैसी कारों को खरीदने के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट होती थी लेकिन आज लोग इन गाड़ियों से लोग दूरी बना रहे हैं. आखिर ऐसा क्या हुआ कि भारतीयों का सस्ती कारों से मन हटता जा रहा है. तो चलिए जानतें हैं इसके पीछे की असली वजह और क्यों घट रही खरीदारों की दिलचस्पी.
बढ़ती महंगाई और बढ़ता टैक्स
बता दें कि, सस्ती कारों की बिक्री घटने की सबसे बड़ी वजह इनकी आसमान छूती कीमतें हैं. पिछले कुछ सालों में स्टील, रबर और पार्ट्स महंगे होने से कारों की इनपुट कॉस्ट काफी बढ़ गई है.
जबकि इसके ऊपर से सरकार द्वारा बढ़ाए गए टैक्स और रजिस्ट्रेशन चार्ज भी बिक्री में असर डाल रहा है. क्योंकि, जो कार पहले 3 से 4 लाख रुपये में आसानी से घर आ जाती थी आज उसके लिए कम से कम 5 से 6 लाख रुपये चुकाने पड़ रहे हैं जो बजट खरीदार के बजट से बाहर हो चुका है.
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सेफ्टी और नए नियमों का भी है असर
आज की तारीख में कार सिर्फ चलाने के लिए नहीं बल्कि सुरक्षित सफर के लिए भी खरीदी जा रही है. सरकार ने कारों में एयरबैग्स, एबीएस, रियर पार्किंग सेंसर और सीटबेल्ट रिमाइंडर जैसे फीचर्स को अनिवार्य कर दिया है.
इसके अलावा कड़े एमिशन नॉर्म्स जैसे BS6 फेज-2 को लागू करने के चक्कर में कार कंपनियों की लागत बहुत बढ़ गई है. इस सेफ्टी और टेक्नोलॉजी के अपग्रेडेशन का सीधा असर कार की कीमतों पर पड़ा है जिससे एंट्री-लेवल कारें अब सस्ती नहीं बिक रही हैं.
मिडिल क्लास की बदल रही है सोच
बता दें कि, आज के युवाओं और उनके मिडिल क्लास परिवारों की सोच पूरी तरह से बदल चुकी है. अब लोग सिर्फ कामचलाऊ गाड़ी नहीं चाहते बल्कि उन्हें स्टेटस और आराम भी चाहिए.
यही मुख्य वजह है कि लोग थोड़ा और पैसा लगाकर कॉम्पैक्ट एसयूवी या प्रीमियम हैचबैक खरीदना पसंद कर रहे हैं. इसके अलावा आसान फाइनेंस और ईजी ईएमआई ऑप्शंस की वजह से खरीदार थोड़ा सा बजट बढ़ाकर बड़ी और बेहतर फीचर्स वाली गाड़ी की तरफ आसानी से शिफ्ट हो रहे हैं.
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