आजकल के युवा अपनी बाइक को लेकर काफी उत्साह में रहते हैं और तरह-तरह के बाइक में मॉडिफिकेशन करा लेते हैं. अक्सर देखा जाता है कि, रॉयल एनफील्ड और स्पोर्टी बाइक्स में लोग कई तरह के बदलाव करवा देते हैं. इन दिनों हमारे देश में तेज गर्जना करने वाले या पटाखे जैसी आवाज निकालने वाले साइलेंसर लगाने का चलन काफी बढ़ चुका है.अगर आपने भी अपनी बाइक का ओरिजिनल साइलेंसर निकालकर उसकी जगह कोई फैंसी या मॉडिफाइड एग्जॉस्ट सिस्टम लगवा रखा है तो अब आपको संभल जाने की सख्त जरूरत है.
देश भर की ट्रैफिक पुलिस ऐसे बाइक सवारों के खिलाफ आर-पार के मूड में है और सड़कों पर स्पेशल अभियान चलाकर भारी-भरकम चालान काट रही है. RTO नियमों के मुताबिक बिना अनुमति गाड़ी के स्ट्रक्चर या कंपनी से मिले साइलेंसर से छेड़छाड़ करना पूरी तरह गैर-कानूनी है. जिसके लिए आपको अपनी जेब ढीली करनी पड़ सकती है.
गैर-कानूनी है साइलेंसर बदलना
आपको बता दें कि, जब कंपनियां कोई बाइक तैयार करती हैं तो उसके साइलेंसर में ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए खास फिल्टर और कैटेलिटिक कनवर्टर लगाए जाते हैं. यह साइलेंसर सरकार द्वारा तय किए गए डेसिबल लिमिट और BS6 एमिशन नॉर्म्स के हिसाब से डिजाइन होता है.
लेकिन जब आप बाजार से कोई लोकल या तेज आवाज वाला साइलेंसर लगवाते हैं तो वह न सिर्फ बहुत ज्यादा शोर पैदा करता है बल्कि जहरीला धुआं भी सीधे हवा में छोड़ता है. साइलेंसर से निकलने वाली तेज और अचानक आवाजें सड़कों पर चल रहे अन्य चालकों का ध्यान भटकाती हैं. जिससे अचानक हादसे होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. इस लिए भारत में ऐसे साइलेंसर लगवाना गैर कानूनी मना जाता है.
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कट सकता है भारी चालान
आपकी बाइक यदि चेकिंग के दौरान पुलिस पकड़ती है और उसमें मॉडिफाइड साइलेंसर मिलता है तो मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के तहत कार्रवाई की जाएगी. नियमों के उल्लंघन पर पहली बार पकड़े जाने पर 1,000 से लेकर 2,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
लेकिन अगर आपकी बाइक से तय सीमा से ज्यादा तेज आवाज निकल रही है या पटाखा फोड़ने जैसी आवाज आ रही है तो ध्वनि प्रदूषण फैलाने के आरोप में यह चालान सीधे 10,000 रुपये तक पहुंच सकता है. इसके अलावा कुछ राज्यों में पुलिस ऑन-द-स्पॉट कानूनी कार्रवाई करते हुए मैकेनिक से आपकी गाड़ी का फैंसी साइलेंसर निकलवाकर उसे रोड रोलर से नष्ट भी कर देती है. जिससे आपका दोगुना नुकसान होता है.
गाड़ी भी हो सकती है सीज
आपको जानकारी के लिए बता दें कि, मॉडिफाइड साइलेंसर का इस्तेमाल करने पर नुकसान सिर्फ चालान तक ही सीमित नहीं रहता. अगर आपकी बाइक में लगा साइलेंसर ध्वनि मानकों का गंभीर उल्लंघन करता पाया जाता है तो ट्रैफिक पुलिस को आपकी बाइक को तुरंत जब्त करने का पूरा अधिकार है. गाड़ी सीज होने के बाद आपको कोर्ट या आरटीओ के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं.
इसके बाद आपको दोबारा कंपनी का ओरिजिनल साइलेंसर लगवाना पड़ेगा और आरटीओ अधिकारी से अप्रूवल मिलने के बाद ही आपकी बाइक छूटेगी. इस पूरी प्रक्रिया में आपका काफी समय और हजारों रुपये बेवजह बर्बाद हो जाएंगे इसलिए ऐसी झंझटों से दूर रहना ही समझदारी है.
करें यह काम
बता दें कि, अगर आप ट्रैफिक चालान और कोर्ट-कचहरी के झंझटों से खुद को दूर रखना चाहते हैं तो आज ही अपनी बाइक में कंपनी का ओरिजिनल एग्जॉस्ट वापस लगवा लें. अगर आपको अपनी बाइक का लुक या साउंड बदलना ही है तो केवल उन्हीं ब्रांडेड और अप्रूव्ड एग्जॉस्ट्स का चुनाव करें जो RTO और पॉल्यूशन डिपार्टमेंट द्वारा सर्टिफाइड हों और जिनमें DB-किलर लगा हो.
हालांकि, सबसे सुरक्षित रास्ता यही है कि आप कंपनी द्वारा दिए गए स्टॉक साइलेंसर का ही इस्तेमाल करें. यह आपकी गाड़ी के इंजन की लाइफ सही रखेगा, माइलेज बेहतर देगा और आपको सड़क पर बिना किसी डर के राइड करने की पूरी आजादी देगा.
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