पहले विदेशों में हमें इलेक्ट्रिक गाड़ियां देखने को मिलती थी लेकिन अब भारत में भी बहुत ही तेजी से EV कारों का डिमांड बढ़ा है. जिसके चलते अब हमें सड़कों पर इलेक्ट्रिक गाड़ियां देखने को मिल रही हैं. हालांकि, तेजी से बिक रही EV गाड़ियों को लेकर एक समस्या बेहद आम है और वह बैटरी फुल होने के बाद भी रेंज बहुत ज्यादा नहीं मिल पाती है.

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अगर आप भी इस तरह की परेशानी का सामना कर रहे हैं तो समझ लीजिए कि इसके पीछे कोई बड़ी तकनीकी खराबी नहीं बल्कि आपकी रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें जिम्मेदार हैं. इलेक्ट्रिक गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरी बेहद संवेदनशील होती हैं. अगर आप चार्जिंग के सही तौर-तरीकों का ध्यान नहीं रखेंगे तो बैटरी की सेहत यानी स्टेट ऑफ हेल्थ तेजी से गिरने लगेगी जिससे आपको फुल चार्ज में भी बहुत कम रेंज का सामना करना पड़ेगा. चलिए जानतें हैं इसके कारण और इस समस्या से कैसे बचा जा सकता है.

हमेशा न करें फुल चार्ज

ऐसा देखा जाता है कि, अपने स्मार्टफोन की तरह ही ज्यादातर लोग अपनी इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर को भी 100 प्रतिशत तक चार्ज करने की जिद में रहते हैं. यह आदत आपकी गाड़ी की बैटरी की लाइफ के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित होती है. लिथियम-आयन बैटरियां 80 फीसदी के बाद हाई-वोल्टेज स्ट्रेस और ज्यादा तापमान झेलती हैं.

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जिससे उनके सेल्स पर बुरा असर पड़ता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि डेली यूज के लिए हमेशा 20 से 80 प्रतिशत का नियम अपनाएं. गाड़ी को केवल तभी 100 फीसदी तक चार्ज करें जब आपको किसी बहुत लंबे सफर पर निकलना हो. रोजाना 80% पर ही चार्जर बंद कर देने से बैटरी लंबे समय तक स्वस्थ रहती है और ड्रॉपिंग रेंज की समस्या धीरे-धीरे खत्म हो जाती है.

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यात्रा के तुरंत बाद न करें चार्ज

जबकि कई बार ऐसा देखा जाता है कि, लोग अक्सर लंबी ड्राइव से घर वापस आते ही तुरंत चार्जर प्लग-इन कर देते हैं. जब आप गाड़ी चलाते हैं तो बैटरी पैक पहले से ही काफी गर्म होता है. इस स्थिति में तुरंत चार्जिंग शुरू करने से बैटरी का तापमान और ज्यादा बढ़ जाता है और ओवरहीटिंग के कारण अंदरूनी केमिकल स्ट्रक्चर बिगड़ने लगता है.

इस लिए ध्यान दें हमेशा सफर खत्म होने के बाद अपनी ईवी को 15 से 20 मिनट के लिए छाया में खड़ा रहने दें. जब बैटरी ठंडी और सामान्य तापमान में आ जाए तभी चार्जिंग सॉकेट से कनेक्ट करें ताकि सेल्स पर बेवजह लोड न पड़े.

फास्ट चार्जिंग का ज्यादा न करें इस्तेमाल

जानकारी के लिए बता दें कि, कम समय में गाड़ी चार्ज करने के लिए डीसी फास्ट चार्जर बेशक एक बेहतरीन ऑप्शन है लेकिन इसका बहुत अधिक इस्तेमाल आपकी गाड़ी की रेंज कम करता है. फास्ट चार्जिंग के दौरान बहुत हाई करंट एक साथ बैटरी सेल्स में भेजा जाता है जिससे गर्मी पैदा होती है और बैटरी तेजी से पुरानी होने लगती है.

अगर आप रोज ऑफिस जाने के लिए गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं तो घर पर लगे नॉर्मल स्लो एसी चार्जर से ही रात में गाड़ी चार्ज करें. फास्ट चार्जर को सिर्फ इमरजेंसी या लंबे सफर के दौरान ही बैकअप के तौर पर इस्तेमाल करना समझदारी है.

बैटरी को कभी न होने दें 0 प्रतिशत

आपको बता दें कि, फुल चार्ज करने की गलती की तरह ही बैटरी को 0% तक ले जाना भी उतना ही नुकसानदायक है. जब आपकी गाड़ी का बैटरी लेवल 15 या 20 प्रतिशत पर आ जाए तो उसे तुरंत चार्जिंग पर लगा देना चाहिए. पूरी तरह डिस्चार्ज होने पर बैटरी के सेल्स डीप-डिस्चार्ज स्टेट में चले जाते हैं.

जिससे दोबारा चार्ज करने पर वे अपनी पूरी क्षमता खो देते हैं. इसके अलावा तेज धूप और खुली गर्मी में गाड़ी चार्ज करने से बचें. इन छोटी-छोटी लेकिन बहुत जरूरी चार्जिंग आदतों को सुधारकर आप अपनी ईवी की बैटरी लाइफ को सालों-साल मजबूत रख सकते हैं और हर सफर में कंपनी द्वारा बताई गई बेहतरीन रेंज का मजा ले सकते हैं.

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