Navgrah Mantra: जीवन में संतुलन से ज्यादा शक्तिशाली कुछ भी नहीं है. जब सभी 9 ग्रहों की ऊर्जा एक साथ आती है, तो मन शांत होने के साथ कर्म ठीक होते हैं और जीवन तालमेल के साथ चलता है.
आज के इस लेख में हम आपको नवग्रहों के बीच मंत्र की जानकारी देंगे, जो 9 ग्रहों का एक दुर्लभ और शक्तिशाली जाप है, जिसे नियमित रूप से पढ़ने पर शांति, सुरक्षा, ताकत, इमोशनल हीलिंग और डेस्टिनी बैलेंस होती है. इन मंत्रों का जाप करते समय आंखें बंद रखें और धीरे-धीरे मन में बोलें.
नवग्रह मंत्रों को सुनने का लाभ
इन नवग्रह मंत्रों को यदि आप नियमित रूप से श्रद्धा और शांति के साथ पढ़ते या सुनते हैं तो मन धीरे-धीरे संतुलित और स्थिर होने लगता है. जीवन में विचार स्पष्ट होने के साथ संतुलन आता है.
यह किसी भी तरह से तात्कालिक चमत्कार नहीं, बल्कि एक सूक्ष्म और गहन आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जिसे रोजाना सुनने या पढ़ने मात्र से आत्मा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
नवग्रह मंत्रों को पढ़ने या सुनने के नियम?
नवग्रह से जुड़े मंत्रों को पढ़ने या सुनने का एक नियम बनाए. सुबह शांत मन से या रात को सोने से पहले इन मंत्रों का सुनना या पढ़ना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है.
बिना किसी उम्मीद के केवल श्रद्धा भावना के साथ सुनिए. ग्रहों की ऊर्जा खुद आपके जीवन में मार्गदर्शन, संरक्षण और आंतरिक शांति प्रदान करेगी.
सूर्य मंत्र (Surya Mantra)
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
- ॐ- ब्रह्मांडीय चेतना
- ह्रां ह्रीं ह्रौं- (ऊर्जा, तेज, आत्मबल)
- सः- दिव्य शक्ति का आवाहन
- सूर्याय नमः- सूर्यदेव को नमन
सूर्य मंत्र का शाब्दिक अर्थमैं तेज, ऊर्जा और जीवन शक्ति के स्त्रोत सूर्य भगवान को नमन करता हूं.
सूर्य मंत्र का भावार्थयह सूर्य मंत्र आत्मविश्वास, स्वास्थ्य, नेतृत्व और जीवन ऊर्जा को जागृत करता है.
चंद्र मंत्र (Chandra Mantra)
ऊं श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम:
चंद्र मंत्र घटक
- ऊं- ब्रह्मांडीय चेतना
- श्रां श्रीं श्रौं- बीज शब्द (शांति, मन, भावना)
- सां- दिव्य शक्ति का आवाहन
- चंद्रमसे नम: चंद्र देव को नमन
चंद्र मंत्र का शाब्दिक अर्थमैं शीतलता, शांत और मन को काबू करने वाले चंद्र देव को नमन करता हूं.
चंद्र मंत्र का भावार्थइस मंत्र के उच्चारण मात्र से मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और करुणा की प्राप्ति होती है.
मंगल मंत्र (Mangal Mantra)
ऊं क्रां, क्रीं, क्रौं सः भौमाय नमः
मंगल मंत्र घटक
- ऊं - ब्रह्मांडीय चेतना
- क्रां, क्रीं, क्रौं - बीज शब्द (शक्ति, साहस और ऊर्जा)
- सः - दिव्य शक्ति का आवाहन
- भौमाय नमः मंगल देव को नमन
मंगल मंत्र का शाब्दिक अर्थमैं निडरता और पराक्रम के प्रतीक मंगल को नमन करता हूं.
मंगल मंत्र का भावार्थइस मंत्र के जाप से डर, आलस्य और क्रोध को नियंत्रित करने के साथ साहस की प्राप्ति होती है.
बुध मंत्र (Budh Mantra)
ऊं ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
बुध मंत्र घटक
- ऊं ब्रह्मांडीय चेतना
- ब्रां ब्रीं ब्रौं (बुद्धि, वाणी, तर्क)
- सः दिव्य शक्ति का आवाहन
- बुधाय नमः बुध देव का नमन
बुध मंत्र का शाब्दिक अर्थमैं बुद्धि और वाणी के देवता बुध देव को नमन करता हूं.
बुध मंत्र का भावार्थयह मंत्र वाणी, स्मरण शक्ति, व्यापार और बुद्धिमत्ता को बढ़ाता है.
गुरु मंत्र (Guru Mantra)
ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
गुरु मंत्र घटक
- ऊं- ब्रह्मांडीय चेतना
- ग्रां ग्रीं ग्रौं - बुद्धि, वाणी, तर्क
- सः दिव्य शक्ति का आवाहन
- गुरवे नमः गुरु देव को नमन
गुरु मंत्र का शाब्दिक अर्थमैं ज्ञान और धर्म के प्रतीक गुरु को नमन करता हूं.
गुरु मंत्र का भावार्थइस मंत्र के जाप से ज्ञान, सौभाग्य और आध्यात्मिकता में उन्नति होती है.
शुक्र मंत्र (Shukra Mantra)
ऊं द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
शुक्र मंत्र का घटक
- ऊं - ब्रह्मांडीय चेतना
- द्रां द्रीं द्रौं -सौंदर्य, प्रेम और कला
- सः दिव्य शक्ति का आवाहन
- शुक्राय नमः शुक्र देव को नमन
शुक्र मंत्र का शाब्दिक अर्थइस मंत्र का अर्थ है कि, मैं प्रेम और सौंदर्य के देवता शुक्र को नमन करता हूं.
शुक्र मंत्र का भावार्थयह मंत्र प्रेम, विवाह, कला और भौतिक सुखों में उन्नति करता है.
शनि मंत्र (Shani Mantra)
ऊं प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
शनि मंत्र का घटक
- ऊं - ब्रह्मांडीय चेतना
- प्रां प्रीं प्रौं - कर्म और अनुशासन
- सः - दिव्य शक्ति का आवाहन
- शनैश्चराय नमः -शनि देव को नमन
शनि मंत्र का शाब्दिक अर्थमैं कर्म और न्याय के देवता शनि देव को नमन करता हूं.
शनि मंत्र का भावार्थइस मंत्र के जाप से कष्टों में धैर्य, स्थिरता और न्याय प्रदान होता है.
राहु मंत्र (Rahu Mantra)
ऊं रां राहवे नमः
राहु मंत्र घटक
- ऊं - ब्रह्मांडीय चेतना
- रां -रहस्यमय शक्ति
- राहवे नमः - राहु देव को नमन
राहु मंत्र का शाब्दिक अर्थमैं भ्रम और परिवर्तन के कारक राहु को नमन करता हूं.
राहु मंत्र का भावार्थयह मंत्र डर, भ्रम, अचानक समस्याओं से रक्षा करते है.
केतु मंत्र (Ketu Mantra)
ऊं कें केतवे नमः
केतु मंत्र का घटक
- ऊं - ब्रह्मांडीय चेतना
- कें - मोक्ष, वैराग्य
- केतवे नमः - केतु देव को नमन
केतु मंत्र का शाब्दिक अर्थमैं वैराग्य और आत्मज्ञान के प्रतीक केतु को नमन करता हूं.
केतु मंत्र का भावार्थयह मंत्र आध्यात्मिकता और आत्मज्ञान के प्रतीक केतु को नमन करता है.
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