AI In Farming: खेती में मौसम का सही अनुमान किसानों के लिए सबसे जरूरी होता है. बारिश कम हो जाए तो फसल की बुवाई से लेकर उत्पादन तक पर असर पड़ सकता है. इसी समस्या को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून ने एआई आधारित एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है. यह तकनीक किसी इलाके में बारिश की कमी का अनुमान लगाने के साथ किसानों को कम पानी में होने वाली फसलों के बारे में भी जानकारी देगी.

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यह सॉफ्टवेयर अलग-अलग इलाकों के मौसम और बारिश से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल करता है. इसके लिए नासा और दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सैटेलाइट से मिलने वाले आंकड़ों की मदद ली जाती है. इनके आधार पर किसी जिले या क्षेत्र में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना का अनुमान लगाया जा सकता है. इससे किसानों को मौसम की स्थिति समझने और फसल को लेकर पहले से तैयारी करने में मदद मिल सकती है.

एक हफ्ते के मौसम को देखकर मिलेगी सलाह

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इस सॉफ्टवेयर से किसनों को सिर्फ बारिश कम होगी या नहीं, इतनी जानकारी ही नहीं मिलेगी. सॉफ्टवेयर मिट्टी के तापमान, हवा में नमी और आने वाले करीब एक हफ्ते के मौसम के अनुमान को भी ध्यान में रखेगा. इन जानकारियों के आधार पर किसानों को खरीफ फसल की बुवाई के लिए सही समय की सलाह दी जाएगी. साथ ही बारिश के साथ बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका की जानकारी भी मिल सकती है. इससे किसान मौसम के हिसाब से खेती की तैयारी कर सकेंगे.

कम पानी वाली फसल चुनने में मिलेगी मदद

कम बारिश होने पर सबसे बड़ी चिंता फसल के उत्पादन और किसान की कमाई को लेकर होती है. ऐसे में यह तकनीक किसानों को ऐसी फसलों का चुनाव करने में मदद कर सकती है, जिनमें पानी की जरूरत कम होती है. सॉफ्टवेयर बारिश की कमी से फसल को होने वाले संभावित नुकसान का प्रति हेक्टेयर अनुमान भी बताएगा. इससे किसान पहले ही तय कर सकेंगे कि मौजूदा मौसम में कौन सी फसल लगाना उनके लिए बेहतर रहेगा.

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मोबाइल पर मिलेगी मौसम और खेती की सलाह

आने वाले समय में किसान स्मार्टफोन पर एप के जरिए इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे. किसान को एप में अपने इलाके का नाम दर्ज करना होगा, जिसके बाद उसे बारिश और मौसम से जुड़ी जानकारी के साथ खेती की सलाह मिल सकेगी. खास बात यह है कि इस जानकारी को किसान व्हाट्सएप या ईमेल के जरिए दूसरे किसानों तक भी भेज सकेंगे. फिलहाल यह तकनीक ट्रायल के तौर पर उपलब्ध है और वैज्ञानिक टीम इसे और बेहतर बनाने पर काम कर रही है.

रबी सीजन को भी जोड़ा जाएगा

अभी यह सॉफ्टवेयर मुख्य रूप से खरीफ फसलों के लिए तैयार किया गया है. आने वाले समय में इसमें रबी सीजन को भी शामिल करने की योजना है. इससे मौसम में बदलाव के बीच किसानों को फसल का चुनाव करने और समय पर खेती से जुड़े फैसले लेने में मदद मिल सकती है.

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