Financial Grant on Agriculture Machinery: भारत में खेती-किसानी को और भी ज्यादा सुविधाजनक बनाने के लिये नई तकनीकों और मशीनों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जा रहा है. इनमें से कुछ मशीनरियां तो आसानी से किसान खरीद सकते हैं, लेकिन कुछ मशीनें किसानों की पहुंच से बाहर है. किसानों को मशीनों-तकनीक के प्रति जागरुक करने और खरीद के बोझ को कम करने के लिये भारत सरकार ने कई योजनायें जारी की है. इन योजनाओं के तहत किसानों को कृषि मशीनरी की खरीद के लिये आर्थिक अनुदान दिया जा रहा है. आइये जानते हैं इन योजनाओं के बारे में....
राष्ट्रीय कृषि विकास योजनाइस योजना के तहत खेती और खेती से जुड़े कामों में प्रशिक्षण और आर्थिक अनुदान के साथ-साथ किसानों को हर संभव मदद दी जाती है. जानकारी के लिये बता दें कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के आधार पर ही जिला और राज्य सरकारें किसानों के लिये योजनायें बनाती हैं. इस योजना के तहत किसानों को फार्म मशीनीकरण, उन्नत व महिला अनुकूल उपकरणों, औजारों के लिए आर्थिक मदद दी जाती है.
कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशनजाहिर है कि खेती में मशीनों का इस्तेमाल करने से मानव श्रम की बचत तो होती ही है, साथ में खेती संबंधी काम भी जल्दी निपट जाते हैं. इसी बात को समझते हुये. छोटे और सीमांत किसानों और पारंपरिक खेती करने वाले गांव और दुर्गम क्षेत्रों तक कृषि मशीनीकरण की पहुंच सुनिश्चित करने के लिये सरकार ने इस मिशन की शुरुआत की. इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों के लिये खेती में विकास और विस्तार की राह को मशीनीकरण के जरिये आसान बनाते हुये कस्टम हायरिंग सेंटर, कृषि मशीनरी बैंक, हाई-टेक हब्स को स्थापित करना और मशीनरियों के वितरण के अनुदान देना शामिल है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन सरकार इस मिशन के जरिये कृषि उत्पादकता में सुधार, किसान उत्पादक संगठन बनाकर कृषि तकनीकों के प्रति जागरुक बनाना, फसलों की मार्केटिंग और मशीनरियों के इस्तेमाल के प्रति जागरुक करने में जुटी है. इसके अलावा, नए कृषि यंत्र खरीद की बजाय पुरानी मशीनरी को बेहतर बनाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है.
नाबार्ड ऋणनाबार्ड यानी नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट को ग्रामीण विकास के लिये एक बड़ी वित्तीय सस्था के रूप में देखा जाता है. नाबार्ड मुख्यरूप से खेती-किसानी और ग्रामीण विकास से संबंधित कार्यक्रमों और नीतियों के संचालन के लिए लोन प्रदान करती है। ग्रामीण विकास के लिये कार्यरत ये संस्था ट्रैक्टर की खरीद पर 30% तक की सब्सिडी और दूसरी कृषि मशीनरियों की खरीद पर 100 प्रतिशत तक का आर्थिक अनुदान भी देती है. इससे ग्रामीण विकास को तो रफ्तार मिलती ही है, किसानों को भी नई तकनीकों के इस्तेमाल के लिये प्रोत्साहन मिलता है.
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