शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का एक ऐसा मंदिर है जहां महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है.

मान्यता के अनुसार महिलाओं में यह डर है कि यहां कार्तिकेय के दर्शन करने पर उन्हें सात जन्म तक विधवा रहना पड़ेगा.

हरियाणा के पिहोवा में बने सरस्वती तीर्थ पर स्थित इस मंदिर में खुद महिलाएं भी नहीं जाना चाहती हैं. इसका कारण है एक श्राप

कथा के अनुसार गणेश जी और कार्तिकेय के बीच सबसे पहले पृथ्वी का चक्कर लगाने की प्रतियोगिता शुरू हुई

इस प्रतियोगिता में गणेश जी जीत गए, तो शिव-पार्वती ने उनका राजतिलक कर दिया, इससे कार्तिकेय नाराज हो उठे.

कार्तिकेय ने माता पार्वती से कहा कि उनके साथ छल किया गया है.

क्रोधित में कार्तिकेय ने अपनी खाल व मांस उतारकर माता के चरणों में रख दिया.

कार्तिकेय ने समस्त नारी जाति को श्राप दिया कि जो स्त्री उनके इस स्वरूप के दर्शन करेगी वह सात जन्म तक विधवा रहेगी.

कार्तिकेय की शारीरिक शांति के लिए तेल और सिंदूर का अभिषेक करवाया. पिहोवा में कार्तिकेय पिंडी रूप में स्थित हैं.