तिरुपति बालाजी मंदिर में घंटियों के अपने आप बजने की घटना की कहानी 1 नवंबर 1979 की रात से जुड़ी है.



रात को अचानक मंदिर की घंटिया कपाट बंद होने के बाद बजने लगीं, जो दूर तक सुनाई दे रही थीं.



मान्यताओं के अनुसार, मंदिर का कपाट सुबह होने पर ही खोला जा सकता था.



सुबह मंदिर के कपाट खुले तो अंदर कोई भी मौजूद नहीं था.



इस घटना ने मंदिर के पुजारियों और कर्मचारियों को हैरत में डाल दिया और इसे चमत्कार नाम दिया गया.



मान्यता है कि भगवान का अपने भक्तों को दर्शन देने या अपनी मौजूदगी का संकेत देने का एक तरीका था.



इस रात के बाद, मंदिर की इस घटना को चमत्कारों में से एक के रूप में याद किया जाता है.



तिरुपति बालाजी मंदिर में कई ऐसी घटनाएं प्रचलित हैं, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से परे हैं.



कुछ लोग इसे हवा का दबाव और मंदिर संरचना के कारण घंटियों का कंपन बताते हैं.