हिन्दू धर्म में शादी से जुड़े कई रीति-रिवाज निभाए जाते हैं,



जिनमें से एक है फेरे की रस्म. दरअसल शादी में फेरों की रस्म सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है,



इसके बिना विवाह पूरा नहीं होता.



लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर शादी में 7 ही फेरे क्यों लिए जाते हैं?



इन 7 फेरों में से 3 फेरों में लड़कियां आगे रहती हैं तो 4 फेरों में लड़के आगे रहते हैं.



फेरों की रस्म निभाने के पीछे एक वजह है,



दरअसल इन 7 फेरों के साथ 7 वचन भी लिए जाते हैं.



पहले ऐसा माना जाता था कि ये सब चीजें लड़के के ही द्वारा प्राप्त हो सकती हैं इसलिए



इन वचनों को निभाने के लिए शुरू के चार फेरे लड़के द्वारा लिए जाने की परंपरा है.



आखिरी के तीन फेरे लड़की लेती है, बाद के तीन फेरे



पुण्य कर्मों, घर की व्यवस्था और पति व्रता होने से जुड़े हैं.



इसलिए विवाह के समय आखिरी के तीन फेरे लड़की द्वारा लिए जाने की परंपरा है.