हिंदू धर्म में नियमित रूप से उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व है.

सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करने से रोग-दोष दूर होते हैं.

लेकिन छठ एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें डूबते हुए सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है.

ऐसी मान्यता है कि, सूर्य सांयकाल में अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं.

इसलिए छठ पर्व में सूर्य की अंतिम किरण प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर उपासना की जाती है.

संध्या अर्घ्य देने से परेशानियों से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य लाभ होता है.

छठ पर्व में संध्या अर्घ्य के बाद अगले दिन ऊषा अर्घ्य देने का भी महत्व है.

डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सूर्य उपासना का छठ पर्व समाप्त होता है.

सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ व्रतधारी 36 घंटे का निर्जला व्रत खोलती है और पारण करती है.