सिर्फ पर्सनल लोन की EMI न भर पाने पर आमतौर पर जेल नहीं होती. यह सिविल मामला माना जाता है.

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EMI मिस होने पर बैंक या NBFC सबसे पहले नोटिस भेजकर भुगतान की याद दिलाता है.

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लगातार EMI नहीं भरने से आपका CIBIL स्कोर खराब हो सकता है, जिससे भविष्य में लोन लेना मुश्किल हो सकता है.

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EMI में देरी होने पर बैंक पेनल्टी और अतिरिक्त ब्याज वसूल सकता है, जिससे कुल बकाया राशि बढ़ जाती है.

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अगर लंबे समय तक भुगतान नहीं किया जाता, तो बैंक बकाया राशि की वसूली के लिए सिविल कोर्ट का सहारा ले सकता है.

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अगर लोन लेते समय धोखाधड़ी, या जानबूझकर धोखा देने का मामला साबित होता है, तब कानूनी कार्रवाई के तहत जेल की नौबत आ सकती है.

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रिकवरी एजेंट आपको धमका नहीं सकते, गाली नहीं दे सकते और न ही जबरन वसूली कर सकते हैं. उन्हें तय नियमों का पालन करना होता है.

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अगर आर्थिक परेशानी है, तो बैंक से संपर्क कर EMI रीशेड्यूलिंग, मोरेटोरियम या सेटलमेंट जैसे विकल्पों पर बात करे.

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बैंक के कॉल और नोटिस को अनदेखा करने के बजाय अपनी वित्तीय स्थिति बताकर समाधान निकालने की कोशिश करें.

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लोन डिफॉल्ट करना सही विकल्प नहीं है. समय पर भुगतान करें और यदि समस्या हो तो बैंक से मिलकर कानूनी और वित्तीय समाधान तलाशें.

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