शून्य या जीरो को गणित में विशेष संख्या माना जाता है.

ओशो अपने प्रवचन में शून्य का क्या अर्थ बताते हैं, आइये जानें.

ओशो के अनुसार शून्यता की कोई सीमा नहीं होती.

शून्य जीवन और अस्तित्व का अनंत विस्तार संभव बनाती है.

ओशो शून्य के अर्थ को लेकर कहते हैं, ना-कुछ होना

यानी रूप विदा हो जाते हैं, सिर्फ रूपविहीनता बनी रहती है.

ओशो के अनुसार शून्यता नकारात्मक दशा नहीं संपूर्णता है.

शून्यता में ही परमात्मा का अनुभव और सत्य,चेतना का आनंद है.

शून्यता से ही परमब्रह्मा का अनुभव होता है.

और शून्यता में ही निराकार आत्मा का भी अनुभव होता है.