हिंदू धर्म में विवाह की कई रस्में होती हैं.



विवाह से संबंधित कुछ रीति-रिवाज और परंपराएं
वर्षो से चली आ रही हैं.


इन्हीं में एक रिवाज है कि मां अपने बेटे की
शादी नहीं देखती है.


मां विवाह से जुड़े हर रीति-रिवाज में शामिल होती हैं,
लेकिन बारात में नहीं जाती.


इसका एक कारण यह बताया जाता है कि, विवाह के
बाद दुल्हन ससुराल आती है.


तब ससुराल में बेटे की मां ही नई दुल्हन का
गृह प्रवेश और अन्य नियम कराती हैं.


इन नियमों की तैयारी करने के लिए भी मां
बेटे की शादी में नहीं जाती.


भारतवर्ष में आज भी यह परंपरा कई राज्यों में
प्रचलित है और निभाई जाती है.


खासकर बिहार, मध्यप्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और
राजस्थान जैसे जगहों पर.


लेकिन समय के साथ कुछ रिवाजों में बदलाव हुए
और अब मां बेटे की बारात में जाती हैं.