तेल की आग में कब तक जलेगी जनता ? | Ghanti Bajao
ABP News Bureau | 28 Apr 2022 11:00 PM (IST)

पहले तो लोग गाड़ी में भरवाने वाले तेल की बढ़ती कीमतों से त्रस्त थे, अब खाने वाले तेल की कीमतें भी बेतहाशा बढ़ती ही जा रही है. सबसे हैरानी वाली बात ये कि जो महंगाई चुनाव से पहले हर पार्टी के घोषणा पत्र का हिस्सा होती है. सत्ता मे आने वाला दल उसे पहली फुर्सत में भूल जाता है. अब देखिए ना जब जब डीजल पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की बात होती है केन्द्र और राज्य एक दूसरे के पाले में गेंद डालने लगते हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न राज्य सरकारों से वैट कम कर लोगों को राहत देने की बात कही तो महाराष्ट्र और बंगाल के सीएम ने ये कहकर बात बदल दी कि पहले सेंटर उनके हिस्से का जीएसटी दे. सवाल ये कि बढ़ती महंगाई पर आखिर कब होगी जनता की सुनवाई.