Citizenship Amendment Bill को लेकर क्या है बहस, क्यों है विरोध, पक्ष-विपक्ष के तर्क जानिए
ABP News Bureau | 11 Dec 2019 09:21 PM (IST)

नागरिकता संशोधन बिल का पूर्वोत्तर में भारी विरोध हो रहा है. दरअसल पूर्वोत्तर राज्यों के स्वदेशी लोगों के एक बड़े वर्ग को ये लगता है कि इस नागरिकता बिल के जरिए जिन शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी उनसे उनकी पहचान, भाषा और संस्कृति ख़तरे में पड़ जाएगी.
लोकसभा में गृहमंत्री ने साफ किया कि ये बिल अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड(दीमापुर को छोड़कर), त्रिपुरा(लगभग 70%) और लगभग पूरे मेघालय में यह कानून लागू ही नहीं होगा. असम में बोड़ो, कार्बी और डिमासा इलाके संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आते हैं, लिहाजा वहां भी ये कानून लागू नहीं होगा.
इसके अलावा अमित शाह ने लोकसभा में ये भी साफ किया कि पूर्वोतर के जिन राज्यों में इनर लाइन परमिट व्यवस्था है, वहां नागरिकता संशोधन बिल लागू नहीं होगा. संसद मे दिए अमित शाह के बयान के मुताबिक, उत्तरपूर्व के राज्यों को नागरिकता संशोधन से नहीं डरना चाहिए.
लोकसभा में गृहमंत्री ने साफ किया कि ये बिल अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड(दीमापुर को छोड़कर), त्रिपुरा(लगभग 70%) और लगभग पूरे मेघालय में यह कानून लागू ही नहीं होगा. असम में बोड़ो, कार्बी और डिमासा इलाके संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आते हैं, लिहाजा वहां भी ये कानून लागू नहीं होगा.
इसके अलावा अमित शाह ने लोकसभा में ये भी साफ किया कि पूर्वोतर के जिन राज्यों में इनर लाइन परमिट व्यवस्था है, वहां नागरिकता संशोधन बिल लागू नहीं होगा. संसद मे दिए अमित शाह के बयान के मुताबिक, उत्तरपूर्व के राज्यों को नागरिकता संशोधन से नहीं डरना चाहिए.