'दोस्त' ऑफ ईरान... 'Ghosts' ऑफ बेरूत !

दोस्त ऑफ ईरान...Ghosts ऑफ बेरूत...ये कहानी है-महायुद्ध के सीक्रेट किरदारों की...ये कहानी उन खतरनाक संगठनों की है-जो ईरान की दोस्ती का दम भरते हैं-और इजरायल की बर्बादी के लिए दिन-रात साजिशें रचते हैं। करीब 40 दिनों तक चले महायुद्ध में भी... एक तरफ अमेरिका और इजरायल था-तो दूसरी तरफ ईरान के साथ खड़े थे-उसके चार दोस्त । जंगी शतरंज के वो चार मोहरे-जिनकी मदद से ईरान ने महायुद्ध की बाजी पलटने का प्लान बना रखा था । आखिर कौन हैं-ईरान के वो 4 मोहरे...जो महायुद्ध में एक साथ कई मोर्चे खोलकर इजरायल को करना चाहते हैं... चेक-मेट ! ईरान के पूर्व सुप्रीम ली़डर अली खामेनेई को आधुनिक ईरान का निर्माता कहा जाता है...ईरान की सैन्य शक्ति को मजबूत बनाने का सारा श्रेय अली खामेनेई को ही दिया जाता है....लंबे समय तक ईरान की सत्ता को कंट्रोल करने वाले अली खामेनेई आज भले ही जिंदा नहीं हैं...लेकिन अपनी मौत से बरसों पहले ही अली खामेनेई ने अपने दुश्मनों के खिलाफ जंगी शतरंज की बिसात बिछा दी थी...उस बिसात पर उन्होंने कई मोहरे भी तैनात किए दिए थे...हिजबुल्लाह...हमास... हूती विद्रोही... और PMF....जैसे मजबूत मोहरे । जंगी शतरंज के ये चार मोहरे...इजरायल को घेरने के लिए नई-नई चाल चलते हैं-पूरी दनिया जानती है इन मोहरों की एक-एक चाल ईरान के इशारे पर आगे बढ़ती है...हिजबुल्लाह... हमास... हूती और PMF की चालों का एक ही मकसद होता है-ईरान के सबसे बड़े दुश्मन इजरायल को उलझाकर रखना...उसे चौतरफा हमलों के चक्रव्यूह में फंसाकर ईरान की मदद करना।